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नगरीय निकाय चुनाव अध्यादेश रद्द कराने शिवराज सिंह राज्यपाल से मिले | MP NEWS

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने सोमवार को राज्यपाल से मुलाकात कर प्रदेश सरकार द्वारा नगरीय निकाय चुनाव को लेकर लाए गए अध्यादेश को रद्द करने की मांग की। श्री चैहान ने कहा कि कमलनाथ सरकार पराजय के डर से नगरीय निकाय के प्रत्यक्ष चुनाव कराने से बच रही है। मुख्यमंत्री कमलनाथ खरीद फरोख्त वाली राजनीति को बढावा देने वाले कदम न उठाए, बल्कि एक कदम आगे बढकर जिला पंचायत और जनपद पंचायत  के अध्यक्ष के चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली से करें। अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली से खरीद फरोख्त और हार्स टेªडिंग चलेगी। सरकार इस खेल को शुरू न करे।

लोकतंत्र की आत्मा प्रत्यक्ष चुनाव

श्री चौहान ने कहा कि जनता सीधे अगर महापौर और नगरीय निकाय अध्यक्ष चुनती है तो वह चुनाव जनता का होता है। लोकतंत्र की आत्मा प्रत्यक्ष चुनाव है लेकिन कांग्रेस की प्रदेश सरकार प्रत्यक्ष चुनाव को बदलना चाहती है। केवल जोड़तोड की राजनीति, सत्ता का दुरूपयोग, बाहुबल और धनबल का उपयोग करके कांग्रेस जनादेश का अपहरण करने की कोशिश करना चाहती है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी इसका कडा विरोध करती है। उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ से नगरीय निकाय के अप्रत्यक्ष चुनाव को लेकर लाए गए अध्यादेश को वापस लेने की मांग की। उन्होंने भोपाल शहर में दो नगर निगम के गठन पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि भोपाल एक है लेकिन दो नगर निगम बनाने की साजिश की जा रही है। ताकि भोपाल को बांट दिया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वोट के आधार पर भोपाल को बांटने की कोशिश कर रही है लेकिन भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के इस कदम का विरोध करेगी।

राज्यपाल पद सभी दलों से उपर, उनको राजधर्म की बात कहना गलत

उन्होंने कांग्रेस नेता विवेक तन्खा द्वारा राज्यपाल को लेकर की गयी टिप्पणी पर कहा कि राज्यपाल श्री लालजी टंडन अनुभव की भट्टी में पके हुए राजनेता है। राज्यपाल के नाते वे दलों से उपर है, लेकिन कोई उनको राजधर्म की बात कहे यह गलत है। राज्यपाल बेहतर जानते है कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं करना है, लेकिन कांग्रेस नेता उन्हें राजधर्म का पालन करने की सीख न दें।

मुख्यमंत्री का मंत्रियों पर नियंत्रण नहीं

श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की सरकार अजब गजब सरकार है। मुख्यमंत्री का मंत्रियों पर कोई नियंत्रण नहीं है। एक मंत्री अलग बयान देता तो दूसरा मंत्री अलग और तीसरा मंत्री अलग और बात बनते बनते कभी बनती है तो कभी बिगडती है। सरकार में नियंत्रण नाम की चीज दिखाई नहीं देती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में ही विभाजन की स्थिति है। एक सोनिया कांग्रेस है तो दूसरी राहुल कांग्रेस। विवाद वहीं चल रहा है और राहुल गांधी देश छोड़कर बैंकाक चले गए है। महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव में राहुल गांधी के समर्थकों में असंतोष है। ऐसी स्थिति में राहुल गांधी कार्यकर्ताओं को मनाने के बजाए बैंकाक जा रहे है।