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अध्यापक से शिक्षक तो बना दिया, अब 7वां वेतनमान के लिए तरसा रही है सरकार | Khula Khat

कन्हैयालाल लक्षकार /भोपाल। प्रदेश के शिक्षा विभाग ने दो दशक बाद शिक्षाकर्मियों के लिए पर्याप्त शोषण करते हुए अपनाना स्वीकार किया। मप्र तृतीय वर्ग शास कर्म संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष कन्हैयालाल लक्षकार ने बताया कि शिक्षा विभाग ने शिक्षक संवर्ग को 1994-95 में डाइंग केडर (मृत संवर्ग) घोषित कर रिक्त पदों पर स्वायत्तशासी संस्थाओं द्वारा शिक्षाकर्मी की नाम मात्र के मानदेय पर वार्षिक अस्थाई भर्ती की गई। 

तीन वर्ष अनुभव के आधार पर पुनः 1998 में शिक्षाकर्मी स्थायी किये गये। उस समय लघुवेतन कर्मचारियों को ₹ 750 से वेतनमान प्राप्त था अतः शिक्षाकर्मी वर्ग 3 को ₹800 से वेतनमान चालू किया गया था । कुछ समय बाद प्रदेश कर्मचारियों को 01/01/1996 से पांचवा वेतनमान स्वीकृत कर 750 को पुनरीक्षित कर 2550 कर दिया। इस बीच 2003 में भर्ती नियमों में संशोधन करते हुए संविदा शिक्षक 15% वार्षिक वेतनवृध्दि के साथ तीन वर्ष तक की भर्ती के पश्चात शिक्षाकर्मी पदों में संविलियन का प्रावधान किया गया था। 

सत्ता परिवर्तन व लगातार संघर्ष के कारण वर्ष 2008 में शिक्षाकर्मी कल्चर समाप्त कर अध्यापक संवर्ग नाम से नवाजा गया व पांचवा वेतनमान लागू किया गया। सितंबर 2008 में प्रदेश कर्मचारियों को जनवरी 2006 से छठें वेतनमान की अनुसंशा लागू कर दी गई। छठा वेतनमान अध्यापक संवर्ग को दस वर्ष बाद जनवरी 2016 से दिया गया, वहीं प्रदेश कर्मचारियों को सितंबर 2017 में 01/01/2016 से एरियर सहित सातवें वेतनमान की अनुसंशा लागू कर दी गई। 

निवृत्तमान सरकार के आदेशानुसार अब अध्यापक संवर्ग को नवीन शिक्षक संवर्ग के साथ जुलाई 2018 से प्रा/मा/उमा शिक्षक पदों के नाम से स्वायत्तशासी संस्थाओं से शिक्षा विभाग में संविलियन के आदेश जारी किये गये हैं। प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को 01/01/2016 से सांतवा वेतनमान दिया गया तो (अध्यापक संवर्ग) नवीन शिक्षक संवर्ग को किस आधार पर ढाई वर्ष विलंब से सातवें वेतनमान का लाभ दिया जा रहा हैं। सत्ता परिवर्तन के साथ लगने लगा था कि अब दो दशक से शोषित इस वर्ग के साथ न्याय होगा। 

वचन पत्र में 1994 वाला शिक्षा विभाग लागू करने की बात दर्ज है लेकिन सरकार ने अभी तक इस पर एक कदम भी नहीं बढ़ाया है । वर्षों से शोषित इस वर्ग से सरकार ने खरबों की राशि जमा कर ली है कि उसका ब्याज ही मासिक भुगतान किया जावे, तो भी आसानी से 01/01/2016 से अन्य कर्मचारियों के समान सातवें वेतनमान का लाभ दिया जा सकता है । प्रदेश सरकार से निवेदन है कि सभी कर्मचारियों व शिक्षकों के समान नवीन शिक्षक संवर्ग को भी 01/01/2016 से सांतवें वेतनमान का लाभ दिया जा कर न्याय प्रदान किया जावे । एक छत, वही बच्चे, वही पाठ्यक्रम, वही सब काम लेकिन वेतनमान में विलंब शोषण की पराकाष्ठा है । अब तो न्याय होना चाहिए।
लेखक कन्हैयालाल लक्षकार मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष हैं।