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INSECT PESTS APP यहां से DOWNLOAD करें, किसानों एवं वनप्रेमियों के लिए

जबलपुर। देश-विदेश के किसानों, वन्यप्रेमियों (FOR FARMERS AND WILDLIFE LOVERS) और आम नागरिकों के लिए प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले करीब 2 सौ प्रकार के कीटों की पूरी जानकारी मोबाइल पर भी मिलेगी। इसके लिए उन्हें सिर्फ अपने मोबाइल के GOOGLE PLAY STORE में जाकर 'आईएनएसईसीटी पीईएसटीएस' एप लोड करना होगा। इसकी DIRECT LINK सबसे नीचे दी गई है यह एप डॉ. नीलेश यादव वैज्ञानिक आईटी सेल ट्रॉपिकल फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (टीएफआरआई) | (Dr NILESH YADAV SCIENTIST TROPICAL FOREST RESEARCH INSTITUTE -TFRI ) ने करीब एक वर्ष लगातार प्रयास करके बनाया है।

टीएफआरआई ने यह MOBILE APP गूगल के लिए जारी कर दिया है, जो कि रविवार की शाम तक गूगल प्ले स्टोर में लोड हो जाएगा। इस एप से देश-विदेश के लाखों, करोड़ों नागरिकों तक सूचना पहुंच सकेगी। यह एप प्रगतिशील किसानों, शोधार्थियों, वन्यप्रेमियों और अन्य नागरिकों के लिए विभिन्न प्रकार के कीटों की पहचान, उनका जीवन, उनसे होने वाले नुकसान और रोकथाम के उपायों की जानकारी देगा। टीएफआरआई के वैज्ञानिक ने इन कीटों को 3 श्रेणियों में बांटा है। इसमें पहला प्राकृतिक जंगल, दूसरा प्लांटेशन और तीसरा नर्सरी है।

वैज्ञानिक डॉ. यादव ने बताया कि इस एप में प्रदेश के प्राकृतिक जंगल में सागौन (टीक), साल, शीशम, तेंदू, पलाश आदि प्रजातियों के वर्षों पुराने पेड़ों में लगने वाले कीट और नुकसान व उनके प्रबंधन के तरीके बताए गए हैं। इसी तरह वर्ग दो में प्लांटेशन को रखा है, जिसमें 10-15 पहले किए गए प्लांटेशन और किसानों के लिए खेतों के किनारे लगाए गए पेड़ों के विभिन्न प्रकार के कीट की पहचान, प्रबंधन की जानकारी मिलेगी। वर्ग तीन में नर्सरी में पौधे तैयार करने के दौरान नुकसान पहुंचाने वाले कीट और उनके प्रबंधन के उपाय दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि सूचना ही शक्ति है। वर्तमान में मोबाइल एप का बीटा वर्जन जारी किया गया है। यह एप वन विभाग के अधिकारियों, वनरक्षकों की कम समय में बड़ी समस्या हल कर सकता है। इसमें नागरिक द्वारा कीट की फोटो डालते ही उसकी पूरी जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं। एप को नागरिकों के कमेंट आने पर खूबियों व कमियों का अध्ययन करके अपडेट भी किया जाएगा।
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