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जन गण का मन है, वंदेमातरम् ! | EDITORIAL by Rakesh Dubey

नई दिल्ली। भारत और उसकी समस्याओं पर विचार करते समय हमें भारत के जन गण का मन भी टटोलना चाहिए | आज़ादी के इतने बरस के बाद समस्याओं के अम्बार में भी जन गण का मन ‘वंदेमातरम्’ ही है | कभी आज़ादी का मन्त्र रहा वंदेमातरम् अब समस्याओं से निराकरण का मन्त्र है | हम यदि पूरी ईमानदारी से इस मन्त्र के भाव को समझ कर जुट जायेंगे तो वो सब हो जायेगा जिसे प्रगति, विकास, या राष्ट्रोत्थान जैसा कोई नाम और परिभाषा दी जाती है। यह अब तक क्यों नहीं हुआ ? एक बड़ा प्रश्न है। सबसे विस्तृत रूप से फैली समस्या भ्रष्टाचार है, जिससे जल्दी और समझदारी से निपटने की आवश्यकता है। निजी और सार्वजनिक क्षेत्र दोनों में शायद ही कोई ऐसा कार्यालय होगा, जो इस रोग से अछूता है। कोई यह भी नहीं बता सकता कि इसके कारण देश की अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान हुआ है।

हालांकि हम में से ज्यादातर लोग इससे चिंतित हैं, लेकिन जब कुछ कार्यवाही करने का समय आता है तो हम भारतीय लोग कानून व्यवस्था में कमियाँ निकालते हैं।देश में निरक्षरता का प्रतिशत आज भी चिंताजनक है। दस में से पाँच व्यक्ति निरक्षर हैं, सिर्फ अक्षर पहचानने और हस्ताक्षर करने से व्यक्ति साक्षर नहीं होता उसमें पंक्ति में छिपा अर्थ समझने का सामर्थ्य होना चाहिए। शहरों की तुलना में गाँवों की हालत ज्यादा खराब है जबकि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कई प्राथमिक विद्यालय स्थापित करवाए गये हैं, फिर भी समस्या जैसी की तैसी बनी हुई है। इसके अलावा,केवल बच्चों को शिक्षा प्रदान करने से निरक्षरता की समस्या का समाधान नहीं हो सकता, क्योंकि भारत में बहुत से वयस्क भी निरक्षर हैं। देश की शिक्षा प्रणाली को दोषी ठहराया जाता है क्योंकि यह अब भी व्यावहारिक और कौशल आधारित न होकर सैद्धांतिक है। छात्र-छात्राएँ ज्ञान प्राप्त करने के लिए नहीं बल्कि अंक प्राप्त करने के लिए पढ़ाई कर रहे हैं, हम इसी प्रकार की शिक्षा प्रणाली का अनुसरण कर रहे हैं।

औपनिवेशिक स्वामी द्वारा इस तथाकथित आधुनिक शिक्षा प्रणाली को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि छात्र नौकरी तो कर सकें लेकिन किसी का नेतृत्व न कर सकें। हम इसी प्रकार की शिक्षा प्रणाली का अनुसरण कर रहे हैं।आज देश में दुनिया के एक तिहाई गरीब रहते हैं, भारत में कुल आबादी का 37 प्रतिशत हिस्सा अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे है। पाँच साल से कम उम्र के 42 प्रतिशत बच्चों का वजन कम है। भारत में अधिकांश गरीब ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल सबसे गरीबी वाले राज्य हैं। गरीब क्षेत्रों में निरक्षरता का उच्च स्तर, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और मूलभूत संसाधनों तक सीमित पहुँच आदि बुनियादी समस्याएँ हैं।

हर चुनाव में हम सरकार चुनते हैं, सरकार समस्याओं का निराकरण नही करती | समस्या निवारण में सरकार का चुनाव हमेशा गलत दिशा में होता है, इस गलत दिशा का नाम तुष्टीकरण है | देश के सर्वांगीण विकास का लक्ष्य वन्देमातरम में ही निहित है. जन गण के मन में अब वंदेमातरम् है यही विकास का मन्त्र है | हमारा हर काम देश के लिए उसी भाव से हो जैसे आज़ादी के संग्राम में हमारा घोष था “वंदेमातरम्”| अब इसे विकास का उद्घोष बनाना होगा |वंदेमातरम्....वंदेमातरम्...वंदेमातरम् !
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श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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