RTE के खिलाफ 10 शिक्षक विधायकों के निजी स्टाफ में अटैच

Updesh Awasthee
भोपाल। राइट टू एजुकेशन ऐक्ट 2009 के मुताबिक, किसी भी शिक्षक को गैर-शिक्षण कार्यों में तैनाती नहीं दी जा सकती। बावजूद इसके मध्य प्रदेश में 10 विधायकों के निजी स्टाफ में शिक्षकों की तैनाती कर दी गई। जनरल ऐडमिनिस्ट्रेटिव डिपार्टमेंट (जीएडी) ने भी इसे लेकर निर्देश जारी किए हैं। 

खबर के मुताबिक, राज्य के 10 नए विधायकों ने अपने स्टाफ में क्लर्क के तौर पर सरकारी स्कूल के मास्टरों को नियुक्ति दी है। बताया जा रहा है कि क्लर्क नियुक्त इन शिक्षकों का वेतन भी विधायक ही तय करेंगे। वहीं, शिक्षा का अधिकार कानून के तहत सरकारी टीचर्स को गैर-शिक्षण कार्यों के लिए नियुक्त किया जाना प्रतिबंधित है। 

9 कांग्रेस और 1 विधायक भाजपा के

खबर के मुताबिक, प्रेमावती सिंह मार्को अपने पति और पुष्पराजगढ़ से कांग्रेस विधायक फुंदेलाल मार्को के पर्सनल क्लरिकल स्टाफ में शामिल की गई हैं। मार्को अनूपपुर जिले के एक प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाती हैं। वहीं, इनके अलावा रघुराज सिंह अपने भतीजे और कांग्रेस एमएलए विजय राघवेंद्र सिंह के क्लर्क बने हैं। इसी तरह से 10 और विधायकों ने अपने क्लरिकल स्टाफ में टीचर्स की तैनाती की है। इनमें कांग्रेस के 9 और बीजेपी का एक विधायक शामिल है। मार्को और रघुराज के अलावा मुरली मोरवाल, दिलीप सिंह गुर्जर, प्रताप ग्रेवाल, बिशाहू लाल सिंह, कमलेश गौड़ जाटव, बनवारी लाल शर्मा, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और लीना जैन ने अपने पर्सनल स्टाफ में सरकारी टीचर्स को शामिल किया है। 

इन नियुक्तियों पर उठे सवाल 

लीना जैन (बीजेपी) को छोड़कर शेष सभी विधायक कांग्रेसी हैं। बताया जा रहा है कि विधायकों के पर्सनल स्टाफ में नियुक्त इन टीचर्स की सैलरी विधायक द्वारा दिए गए प्रमाणपत्र से तय की जाएगी। वहीं, राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए विधायकों इन नियुक्तियों पर सवाल उठने लगे हैं। स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट रेकॉर्ड्स के मुताबिक, राज्य में 2 हजार 644 प्राइमरी स्कूल्स और एक हजार 918 मिडिल स्कूल हैं। इन स्कूलों में टीचर्स के काफी पद खाली हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि राज्य सरकार के 4 हजार 562 स्कूल बिना किसी रेगुलर टीचर के चल रहे हैं। 

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