दूध माफिया का क्या बिगाड़ लेगी सरकार जब साँची की लैब ही घोटालेबाज है | MP NEWS

भोपाल। भोपाल सहकारी दुग्ध संघ, जहां से करीब 3 लाख लीटर दूध की बिक्री की जाती है और लोग विश्वास करते हैं कि दूध यदि सांची का है तो शुद्ध ही होगा, मिलावट रहित ही होगा, पाश्चुरीकृत ही होगा लेकिन वो गुणवत्ता रहित और मिलावटी भी होता है। भोपाल सहकारी दुग्ध संघ की लैब घोटालेबाज है। यहां रिश्वत देने वालों का दूध शुद्ध और ना देने वालों का मिलावटी हो जाता है। इसके प्रमाण भी हैं। 

केस-1ः दूध निकालकर मिलाया था पानी, पर लैब की रिपोर्ट में अंतर नहीं

12 जून को भोपाल दूध संघ का टैंकर एमपी 09 एचजी 2962 राजगढ़ से 20 हजार लीटर दूध लेकर भोपाल के लिए निकला था। जिसे कुरावर-गांधीनगर के रास्ते भोपाल दुग्ध संघ पहुंचना था। टैंकर रात 12 बजे श्यामपुर से सीहोर होते हुए हीरापुर के पास फार्म हाउस पर पहुंच गया था। यहां टैंकर से दूध निकाला गया और मोटर पंप से पानी मिलाया गया। घटना का वीडियो वायरल हुआ था। इस टैंकर को पुलिस के सुपुर्द किया गया। फिर भोपाल संघ लाया गया। यहां दूध की जांच कराई गई, जिसमें दूध की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं मिला था।

यह बात संघ के तत्कालीन सीईओ के कहने पर महाप्रबंधक संयंत्र पीके शर्मा ने बताई थी। टैंकर में 20 हजार लीटर दूध था। मीडिया में मामले का खुलासा हुआ सरकार ने एक दर्जन अधिकारी, कर्मचारियों पर कार्रवाई कर दी थी। टैंकर संचालक को ब्लैक लिस्ट किया था। ड्राइवर, कंडक्टर पर सीहोर में एफआईआर दर्ज हुई थी।

केस-2ः सिंथेटिक दूध सप्लाई हुआ था, लैब नहीं पकड़ पाई, तहसीलदार ने पकड़ा

नरसिंहगढ़ तहसील की एक दूध खरीदी करने वाली सहकारी समिति के संचालक के घर से तहसीलदार ने शैंपू समेत कई तरह की अमानक सामग्री पकड़ी थी। यह कार्रवाई बीते साल की गई थी। इस सामग्री से वह सिंथेटिक दूध तैयार करता था। बाद में यही दूध भोपाल दुग्ध संघ में सप्लाई करता था। इसके बावजूद संघ की लैब की जांच रिपोर्ट में मिलावट पकड़ में नहीं आ रही थी। इतना ही नहीं, साल 2016 में भोपाल दुग्ध संघ में एक टैंकर पकड़ा गया था, जिसके अंदर अलग से चैंबर बना हुआ था। इस चैंबर में दूध के नाम पर हजारों लीटर पानी बेचा जा रहा था। तब भी लैब जांच में कुछ नहीं मिला था।

क्यों घोटालेबाज हो गई सांची की लैब

बलराम बारंगे, पूर्व डायरेक्टर भोपाल सहकारी दुग्ध संघ का कहना है कि कुछ अधिकारियों की पूरी सेवा ही भोपाल संघ के प्लांट व लैब में हो गई है। इन्हें तत्काल बदलने की जरूरत है। इनमें से कुछ अधिकारी बड़े स्तर पर गड़बड़ी कर रहे हैं। संघ में कई स्तर पर गड़बड़ियां हो रही हैं। अभी भी दूध की पर्याप्त व वैज्ञानिक तरीके से संपूर्ण जांच नहीं हो रही। सरकार को संघ के पूरे सिस्टम को नए सिरे से देखना चाहिए।

मामले को टालने वाला बयान

शमीमुद्दीन, सीईओ भोपाल सहकारी दुग्ध संघ का कहना है कि पहले क्या हुआ, यह मुझे नहीं मालूम। आगे कोई गड़बड़ी न हो, इसको लेकर कार्रवाई की जा रही है। लैब में सालों से जमे ठेका श्रमिकों को हटा दिया है। मूल और अनुभवी कर्मचारियों को उनकी जगह पर वापस भेज दिया है। अब जो भी गड़बड़ी करेगा, उसे नहीं छोड़ा जाएगा। सीईओ ने यह नहीं बताया कि सिंथेटिक दूध का मामला सामने आने के बाद उन्होंने खुद उपस्थित होकर कितनी बार लैब जांच करवाई। या लैब की प्रमाणिकता को परखने की कोशिश भी की। 

ये है घोटाले की जड़, जिसकी जांच नहीं हो रही

प्रदेश में मिलावटी व नकली दूध का मामला सामने आने के बाद भोपाल दुग्ध संघ की लैब में काम करने वाले 15 ठेका श्रमिकों को हटा दिया गया है। इनसे प्लांट में दूसरी जगह सेवाएं ली जा रही हैं। ये सालों से लैब में जमे थे। जबकि लैब के स्थाई कर्मचारियों से अधिकारी दूसरी जगह काम करा रहे थे। इनमें से कई तो ऐसे थे जिनके पास लैब में काम करने की डिग्रियां ही नहीं थीं। फिर भी ये 10 साल से जमे हुए थे। खास बात यह है कि इनका वेतन 7 से 12 हजार रुपए है फिर भी इनमें से कई चार पहिया गाड़ी मेंटेन करते हैं। सवाल यह है कि इनकी नियुक्तियां करने वाले अधिकारियों को जांच की जद में क्यों नहीं लिया जा रहा। क्यों ना यह मान लिया जाए कि शमीमुद्दीन, सीईओ भोपाल सहकारी दुग्ध संघ को इसकी पूरी जानकारी थी और मामला सुर्खियों में आया तो दबाने के लिए 15 संविदा कर्मचारियों को हटा दिया।