मप्र के लोग हर मामले में दूसरे राज्यों से पिछड़े: कमलनाथ सरकार की रिपोर्ट | Madhya Pradesh Economic Survey 2018-19

भोपाल। विधानसभा में बुधवार को पेश किए जाने वाले वित्त वर्ष 2019 20 के बजट के एक दिन पहले आज जारी किए गए मध्यप्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 में प्रदेश को हर क्षेत्र में देश के दूसरे प्रदेशों की तुलना में काफी पिछड़ा बताया गया है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि राज्य की सामाजिक आर्थिक विकास की समीक्षा करने पर स्थिति स्पष्ट है कि प्रदेश मानव विकास के मानकों पर देश एवं समान परिस्थितियों वाले राज्यों की तुलना में पिछड़ रहा है। गरीबी उन्मूलन आकड़े और स्वास्थ्य सूचकांकों को राष्ट्रीय स्तर के समकक्ष लाना एक प्रमुख चुनौती है। सर्वेक्षण के अनुसार शिक्षा और पोषण के क्षेत्र मे भी राज्य की स्थिति बेहतर नहीं है।

प्रति व्यक्ति आय 1 लाख रुपए से भी कम

सर्वेक्षण के अनुसार मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति आय देश एवं समान परिस्थिति वाले राज्यों की तुलना में कम है।
मध्यप्रदेश को कम प्रति व्यक्ति आय वाले राज्यों की श्रेणी में रखा जाता है। 
वित्त वर्ष 2018 19 के प्रचलित मूल्य पर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 90998 रूपए थी, जो देश की प्रति व्यक्ति आय 01 लाख 26 हजार 6 सौ 99 रूपयों का मात्र 71.8 प्रतिशत है। 
देश के प्रमुख राज्यों में बिहार, झारखंड, ओड़िसा और उत्तरप्रदेश को छोड़कर शेष राज्यों की प्रति व्यक्ति आय मध्यप्रदेश से अधिक है।

गरीबों की संख्या सबसे ज्यादा

सर्वेक्षण के मुताबिक देश में गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले व्यक्तियों का अनुपात 21.92 प्रतिशत और मध्यप्रदेश में 31.65 प्रतिशत है। 
देश में उत्तरप्रदेश और बिहार राज्यों को छोड़कर मध्यप्रदेश में सर्वाधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे है, जिनकी संख्या दो करोड़ 34 लाख है। 

यहां भी पिछड़े

केवल 30 प्रतिशत लोग खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करते हैं।
राज्य में सिर्फ 23 प्रतिशत घरों में नल द्वारा पानी आता है।
कृषि मजदूरी की दर 210 रूपए देश के अन्य राज्यों की तुलना में न्यूनतम है।
मनरेगा में 68. 25 लाख परिवार दर्ज हैं, जो व्यापक गरीबी का सूचक है।

शिशु मृत्यु दर

राज्य में प्रति हजार जीवित जन्म पर शिशु मृत्यु दर 47 है, जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है। राष्ट्रीय स्तर पर शिशु मृत्यु दर 33 प्रति हजार है।
राज्य में मातृत्व मृत्यु दर प्रति एक लाख प्रसव पर 173 है, जो राष्ट्रीय दर 130 और अधिकतर राज्यों की तुलना में बहुत अधिक है। 
राज्य में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर 77 (वर्ष 2011) है, जो कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में असम को छोड़कर सर्वाधिक है।
प्रदेश में 52.4 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी से पीड़ित हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं।