RATLAM में महिला वैज्ञानिक ने चेयरमैन पर प्रताड़ना का आरोप लगाया | MP NEWS

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RATLAM में महिला वैज्ञानिक ने चेयरमैन पर प्रताड़ना का आरोप लगाया | MP NEWS

इंदौर। कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा (रतलाम) [Krishi Vigyan Kendra Kalukheda, ratlam (KVK)] में पदस्थ रहीं महिला मृदा वैज्ञानिक ने संस्था का संचालन करने वाली शिक्षा समिति के चेयरमैन केके सिंह कालूखेड़ा (KK SINGH KALUKHEDA) पर प्रताड़ित करने व शोषण का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मेरे साथ नौकरानी जैसा व्यवहार किया जाता था। इधर चेयरमैन कालूखेड़ा व केवीके इंचार्ज डॉ. सर्वेश त्रिपाठी का कहना है वो उनकी हरकतों के कारण उन्हे बर्खास्त किया गया तो आरोप लगाने लगीं। संस्था के सभी कर्मचारी उनसे परेशान हैं। 

रतलाम जिले की पिपलौदा तहसील के कालूखेड़ा में शिक्षा समिति कालूखेड़ा द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र संचालित है। इसमें केंद्र सरकार से किसानों से जुड़ी गतिविधियों व शोध के लिए फंड मिलता है। इसी से केंद्र का संचालन होता है। संस्था के चेयरमैन कांग्रेस नेता केके सिंह कालूखेड़ा हैं। यहां पांच साल से मृदा वैज्ञानिक पद पर पदस्थ रही समस्तीपुर बिहार हाल मुकाम कालूखेड़ा निवासी महिला अधिकारी ने 26 अप्रैल को एक पत्र संस्था चेयरमैन के नाम लिखा।

इसमें लिखा कि आपकी संस्था में आपके द्वारा मुझे अत्यधिक प्रताड़ित किया अथवा करवाया गया। मेरा शोषण होता रहा। मेरे खिलाफ गुटबाजी कर शिकायतें करवाई गई। बाद में मेरे पति के समक्ष मुझे गलत साबित करने की कोशिश की। इसलिए मैं ऐसी संस्था में काम करना नहीं चाहती हूं। इसके लिए श्रीमान आप जिम्मेदार है। यह लेटर बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। महिला वैज्ञानिक का कहना है कि कई बार शिकायतें की। पुलिस में आवेदन दिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बल्कि मुझे बर्खास्त करने व झूठा साबित करने के लिए गलत कागज तैयार किए गए हैं। 

इंचार्जशिप नहीं मिली तो बनाई झूठी कहानी, बर्खास्त किया तो आरोप लगा दिए

संस्था के चेयरमैन केके सिंह का कहना है कि सालभर पहले केवीके इंचार्ज का पद रिक्त था। इसकी भर्ती निकली तो यहीं पदस्थ मृदा वैज्ञानिक ने अप्लाई किया लेकिन तब ये निर्धारित पात्रता नहीं रखती थीं। अन्य पात्र आवेदन भी नहीं आए, इसलिए पद खाली ही रहा। 6 माह बाद फिर से भर्ती निकली तो इन्होंने आवेदन किया और इस बार अनुभव प्रमाण-पत्र लगाकर पात्रता बता दी।

चयन समिति ने किन्हीं कारणों से इनका चयन नहीं किया। बाद में संस्था को शंका हुई कि छह महीने में पात्रता प्रमाण-पत्र कैसे बन गया। इसकी जांच की तो प्रमाण-पत्र शंकास्पद निकला। यह बात उजागर होने के बाद से इन्होंने झूठी कहानी बनाकर आरोप लगाना शुरू कर दिए। यहां 15 लोगों का स्टाफ है। बाकी 14 इनके व्यवहार से परेशान हैं। इसलिए प्रबंधन कमेटी ने नियमानुसार कार्रवाई कर इन्हें बर्खास्त कर दिया। इसलिए ऐसे झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने इस्तीफा भी नहीं दिया, केवल एक आरोप भरा पत्र लिखा है। इनके पति के समक्ष स्थिति स्पष्ट करते हुए ही नियमानुसार बर्खास्त किया गया है।