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सजायाफ्ता कर्मचारी की पेंशन रोकने के लिये नोटिस जरूरी नहीं: हाईकोर्ट | JABALPUR NEWS

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ कर दिया कि किसी भी आपराधिक मामले (Criminal cases) में सजा पा चुके सरकारी कर्मी की पेंशन रोकने का आदेश जारी करने के पूर्व उसे शोकॉज नोटिस देना या उसे अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर देना आवश्यक नहीं है। पांच जजों की लार्जर बेंच ने संवैधानिक प्रश्न का निराकरण करते हुए यह व्यवस्था दी। लार्जर बेंच में मुख्य न्यायाधीश एसके सेठ, जस्टिस आरएस झा, नंदिता दुबे, राजीव कुमार दुबे व संजय द्विवेदी शामिल थे। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने कानूनी प्रश्न से जुड़ा यह मामला लार्जर बेंच को भेजा था।

जबलपुर अंतर्गत सिहोरा निवासी लाल साहब बैरागी ने याचिका दायर कर कहा कि वह मझौली नगर पंचायत में सीएमओ के पद से रिटायर हुआ। नौकरी के दौरान उसके खिलाफ लोकसंपत्ति का दुरुपयोग करने के लिए भादंवि की धारा 409, 120 बी, और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 (1 ) (डी ) 13 (2) के तहत अपराध पंजीबद्घ किया गया। इस मामले में उसे जिला अदालत ने दोषी पाकर सजा सुनाई। लेकिन उसने हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दे दी। हाईकोर्ट ने उसकी अपील पर निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा निलंबित कर दी। रिटायरमेंट के बाद 8 अगस्त 2016 को राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर उक्त सजा को आधार बनाते हुए उसकी पेंशन रोक दी।

अधिवक्ता विपिन यादव ने दलील दी कि यह अनुचित है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों व हाईकोर्ट की लार्जर बेंच के रामसेवक मिश्रा के मामले में 2017 में दिए गए फैसले का हवाला दिया गया। कहा गया कि तहत रिटायर्ड कर्मी की पेंशन रोकने के पूर्व उसे शोकॉज नोटिस या सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए था। न्यायमूर्ति आरएस झा व जस्टिस संजय द्विवेदी की युगलपीठ के समक्ष यह प्रश्न उपस्थित हुआ कि अपराधिक मामले में सजायाफ्ता कर्मी की पेंशन रोकने के पूर्व शोकॉज नोटिस जरूरी है या नहीं। इस पर युगलपीठ ने इस संवैधानिक प्रश्न का निराकरण करने हेतु मामला पांच जजों की लार्जर बेंच के समक्ष भेजा था।

यह कहा लार्जर बेंच ने- हाईकोर्ट की लार्जर बेंच ने कहा कि पेंशन रूल्स 8 ( 2) के तहत जब कोई कार्रवाई की जाती है तो संबंधित को नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने रामसेवक मिश्रा के मामले में दिए गए हाईकोर्ट के पूर्व निर्णय को निरस्त कर दिया। लार्जर बेंच ने कहा कि आपराधिक मामले में सजा पा चुके कर्मी की पेंशन रोकने के पूर्व उसे शोकॉज नोटिस, पूर्व सूचना या अपना पक्ष रखने का अवसर देना आवश्यक नहीं।