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PRAGYA SINGH THAKUR का AAP KI ADALAT में INTERVIEW YOUTUBE VIDEO

17 April 2019

भोपाल। महामंडलेश्वर प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भाजपा का प्रत्याशी घोषित कर दिया गया है। ज्यादातर लोगों को यह पता है कि वो मालेगांव बम ब्लास्ट की आरोपी थीं। कांग्रेस की सरकार में उनकी गिरफ्तारी हुई और भाजपा की सरकार में वो रिहा कर दी गईं लेकिन सवाल यह है कि प्रज्ञा सिंह के विचार क्या हैं। वो लोकतंत्र के बारे में क्या सोचतीं हैं। क्या वो मुसलमानों की विरोधी हैं। ऐसे तमाम सारे सवालों के जवाब उन्होंने आप की आदालत में एक इंटरव्यू में दिए। इंटरव्यू के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं। यदि आप पूरा इंटरव्यू देखना चाहते हैं तो वो सबसे नीचे नजर आएगा। 

सन्यास लिया नहीं जाता। सन्यास हो जाता है। लोकेष्णा, वित्तेषणा और उत्तेष्णा जीवन से समाप्त हो जाती है तो व्यक्ति सन्यासी हो जाता है। 
मुस्लिम इस धरती के एक भाग हैं। जहां देशद्रोही ताकतें वर्चस्व दिखाएंगी। देशद्रोहियों का वध करना इस देश की परंपरा है। यह देश के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। 
अखाड़ों का यही काम है। धर्म का प्रचार और देश के रक्षार्थ चार मठों की स्थापना की। हम शस्त्र और शास्त्र दोनों का प्रशिक्षण दिया जाता है। 
अभिनव भारत से मेरा कोई संबंध नहीं है। मैं उसकी सदस्य नहीं हूं। 
आतंकवादियों को मारने के लिए बम ब्लास्ट की जरूरत नहीं होती। 
दिग्विजय सिंह दिग्भ्रमित हैं। व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए उन्होंने सारे षडयंत्र रचे। 

मालेगांव बम ब्लास्ट: 
एटीएस को मैं दोषी नहीं मानती। यह षडयंत्र कांग्रेसियों का था। उन्होंने 'भगवा आतंकवाद' को सिद्ध करने के लिए यह प्रारंभ किया और मुझे इसका शिकार बनाया। 
वो बाइक जिसका उपयोग ब्लास्ट में हुआ उसे मैं 4 साल पहले बेच चुकी थी। मेरा सन्यास हो चुका था। 
अभिनव भारत की किसी भी मीटिंग में मैं शामिल नहीं थी। 
13 दिनों तक एटीएस ने अवैध रूप से मुझे एक कालकोठरी में बंद रखा और एटीएस के पुरुष अधिकारी मुझे पीटते थे। (गला भर आया, पानी मांगा)
कुछ थप्पड़ मारते तो कोई बात नहीं। रात से ही उन्होंने पीटना शुरू कर दिया। बेल्ट से पीटा। उनका पीटने वाला बैल्ट सामान्य नहीं होता। 
24 दिन तक दिन रात पिटाई की। मैरे हाथ और पैर काले पड़ जाते थे। रात में सोने नहीं ​देते थे। 
थक जाते थे तो गंदी गंदी गालियां देते थे। 
अधिकारी बदल जाते थे लेकिन मुझे नियमित रूप से प्रताड़ित करना चाहते थे।
दिग्विजय सिंह को राष्ट्रवाद से, भगवा से बहुत डर लगता है। 



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