साध्वी प्रज्ञा ठाकुर से डॉक्टर नाराज, बोले: झूठ बोलतीं हैं प्रज्ञा सिंह | NATIONAL NEWS

मुंबई। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बयानों से नाराजगी बढ़ती जा रही है। देश भर की पुलिस में नाराजगी नजर आ रही है। मराठी समाज नाराज है। मुसलमान समाज नाराज है और अब डॉक्टर भी नाराज हो गए है। उन्होंने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को झूठी बताया है। 

साध्वी के दावे का कोई प्रमाण नहीं है

मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर संस्थान के डॉक्टरों ने साध्वी प्रज्ञा को उस बयान को भ्रामक बताया है, जिसमें उन्होंने गोमूत्र से कैंसर ठीक होने का दावा किया था। टाटा मेमोरिया सेंटर के डायरेक्टर डॉ. राजेंद्र बाडवे ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह साबित करे कि गोमूत्र या इस तरह का दूसरा प्रॉडक्ट कैंसर ट्रीटमेंट के लिए फायदेमंद होता है। बाड़वे ने कहा, 'ऐसी कोई स्टडी नहीं है जो इस तरह के दावों का समर्थन करे। सिर्फ रेडियोथेरपी, कीमोथेरपी और अब इम्युनोथेरपी ही ब्रेस्ट कैंसर के लिए साइंटिफिक ट्रीटमेंट के रूप में दुनियाभर में मौजूद हैं।' डॉ. राजेंद्र देश के मशहूर वरिष्ठ ब्रेस्ट ऑन्को सर्जन में से एक हैं। 

प्रज्ञा ठाकुर को कैंसर जैसी कोई बीमारी नहीं थी: डॉक्टर लहाने

बता दें कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने दावा किया था कि 2010 में उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हुआ था जब वह मालेगांव ब्लास्ट के आरोपों के सिलसिले में महाराष्ट्र एटीएस की कस्टडी में थीं। उस समय जेजे अस्पताल में उनके कई टेस्ट हुए। उस वक्त अस्पताल के डीन डॉ. जेपी लहाने ने बताया कि इस बात के कोई संकेत नहीं है कि प्रज्ञा को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हुई थी। जेजे अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि सीए 125 ब्रेस्ट मार्कर टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव थी और उनकी एमआरआई स्कैन रिपोर्ट और ईसीजी रिपोर्ट भी बिल्कुल नॉर्मल थी। 

प्रज्ञा ठाकुर का बयान भ्रम फैलाने वाला है: डॉ. बाडवे

प्रज्ञा ने सोमवार को अपने नामांकन से पहले एक टीवी न्यूज चैनल से बातचीत में कहा था कि वह कैंसर से पीड़ित थीं। उन्होंने कहा, 'मैंने गोमूत्र और आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन करके खुद का इलाज किया था।' डॉ. बाडवे और उनकी टीम ने कहा कि इस तरह के दावे लोगों के बीच भ्रम फैला सकते हैं।  सेंटर के ऐकडेमिक्स डायरेक्टर डॉ. श्रीपद बनावली ने कहा, 'ब्रेस्ट और ब्लड कैंसर उपचार योग्य होते हैं लेकिन सिर्फ सिद्ध साइंटिफिक इलाज के साथ ही। अगर कोई गोमूत्र से ब्रेस्ट कैंसर ठीक होने का दावा कर रहा है तो क्या वह किसी अध्ययन के जरिए इसे साबित कर सकता है?'