Loading...

साध्वी प्रज्ञा सिंह: जीतीं तो मंत्री, हारीं तो प्रदेश अध्यक्ष | MP NEWS

भोपाल। लोकसभा चुनाव 2019 ने एबीवीपी की धाकड़ कार्यकर्ता से साध्वी बनीं प्रज्ञा सिंह ठाकुर (SADHVI PRAGYA SINGH THAKUR) की किस्मत का सितारा चमका दिया है। वो भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहीं हैं। जीतीं तो केंद्र में राज्यमंत्री बनाई जाएंगी और यदि हार भी गईं तो उनकी राजनीति खत्म नहीं होती बल्कि राजनीति का स्वर्णिम काल शुरू होगा। वो मध्यप्रदेश की भाजपा में नरेंद्र सिंह तोमर का विकल्प बनेंगी। प्रदेश अध्यक्ष भी बनाई जा सकतीं हैं। 

मात्र 10 दिन में देश भर की चर्चा का केंद्र


17 अप्रैल को साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भाजपा ज्वाइन की और 3 घंटे के भीतर उन्हे प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। इसी के साथ वो चर्चा के केंद्र में आने लगीं। मात्र 10 दिन में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर देश भर की चर्चा का केंद्र बन गईं। पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह से लेकर भाजपा के छोटे कार्यकर्ता तक, देश भर में उनकी वकालत कर रहे हैं। अब उनकी एक पहचान है। सारा देश उन्हे जानता है। उनके बारे में लोगों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं पंरतु अब वो पहचान की मौहताज नहीं हैं और राजनीति में यह हमेशा फायदे की बात होती है। 

मध्यप्रदेश की राजनीति में स्थापित होंगी


लोकसभा चुनाव के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर मध्यप्रदेश की राजनीति में स्थापित होंगी। भाजपा को उनकी कई बार आवश्यकता होगी इसलिए उन्हे महत्वपूर्ण पद भी दिया जाएगा। कांग्रेस की कथित साजिश 'भगवा आतंकवाद' के खिलाफ साध्वी प्रज्ञा सिंह को भाजपा ने एक प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत किया है। यदि अमित शाह के साथ प्रज्ञा सिंह का तालमेल सही रहा। वो चुनाव जीत गईं और केंद्र में मोदी सरकार बनी तो लगभग तय है कि वो कम से कम राज्यमंत्री तो होंगी। यदि यह संभव नहीं हुआ तो तब भी उन्हे महत्व मिलेगा। सांसद राकेश सिंह सफल प्रदेश अध्यक्ष साबित नहीं हुए। प्रज्ञा सिंह उनका विकल्प हो सकतीं हैं। 

नरेंद्र सिंह तोमर की जगह लेंगी


केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर से आते हैं। वह ग्वालियर जो ज्योतिरादित्य सिंधिया की रियासत कहा जाता है। यहां ठाकुरों का दबदबा भी है। नरेंद्र सिंह तोमर इस बार डरे हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने अपनी ग्वालियर सीट छोड़ दी। वो मुरैना भी लड़ना नही चाहते थे। इनके कारण संगठन में उनकी धमक कमजोर पड़ गई। प्रज्ञा सिंह को उनकी जगह स्थापित किया जा सकता है। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह के बाद भाजपा को कम से कम एक नया स्टार प्रचारक तो मिल ही गया।