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5 साल में सिर्फ 21% को मिली सरकारी नौकरी, 36% को प्राइवेट नौकरी भी नहीं मिली | SURVEY REPORT

नई दिल्ली। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के ताजा सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस सर्वे में बताया गया है कि नौकरी के लिए अप्लाई करने वालों में सिर्फ 21% परिवारों में किसी सदस्य को सरकारी स्थाई या अस्थाई नौकरी मिली जबकि 36% लोगों को प्राइवेट नौकरी भी नहीं मिल पाई। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री ने यह सर्वे 27,000 लोगों के बीच किया गया, जिनमें 55% शहरी और 45% ग्रामीण थे। इसमें कहा गया है कि पांच वर्षों में जेनरेट होने वाली कुल नौकरियों में सिर्फ 21% ही सरकारी स्तर पर हुई हैं, जबकि बाकी प्राइवेट, सेल्फ एम्प्लॉयमेंट, पीपीपी में जेनरेट हुई हैं। 

महानगरों और बड़े शहरों में सबसे ज्यादा रोजगार 

गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 75% घरों ने बताया कि उनके यहां नौकरी की दरकार थी और इनमें से 64% के यहां किस-न-किसी को 2014 से 2018 के बीच रोजगार मिल गया। सबसे ज्यादा रोजगार महानगरों और बड़े शहरों में मिला है। रोजगार पाने वालों में 86% की उम्र 18-35 वर्ष के बीच पाई गई। 

21.4% रोजगार पब्लिक सेक्टर से 

पीएचडी चैंबर के प्रेजिडेंट राजीव तलवार ने बताया कि इस अवधि में सबसे ज्यादा 60.4% नौकरियां प्राइवेट सेक्टर में बनी हैं जबकि सरकारी सेक्टर ने 21.2% रोजगार दिया। 5.2% लोगों ने स्वरोजगार चुना है जबकि पब्लिक सेक्टर और पीपीपी के तहत क्रमशः 5.1 और 3.3% रोजगार दिए गए हैं। 

सूक्ष्म और लघु उद्योगों से 51% रोजगार 

सर्वे के मुताबिक, बड़ी और मझोली कंपनियों ने 49% रोजगार दिया है जबकि माइक्रो और स्मॉल इंडस्ट्रीज ने 51% रोजगार दिया है। रोजगार देने वाले सेक्टरों में बैंकिंग (12.5), एजुकेशन और ट्रेनिंग (12.1%), आईटी और आईटीईएस (11.6%) अव्वल रहे हैं। इसके अलावा टैक्स, डेटा ऐनालिटिक्स, कंसल्टिंग, लीगल सर्विसेज, टीचिंग, फैशन में भी ज्यादा हायरिंग हुई है। बता दें कि ये नौकरियां ऐसी हैं जिनमें स्थायित्व नहीं होता, इसके अलावा वेतनमान भी अच्छा नहीं होता। 

60% को 10 से 50 हजार सैलरी, व्यापारी खुश, बेरोजगार निराश

नौकरी पाने वाले 64% में से 60% की सैलरी 10,000 से 50,000 रुपये के बीच रही है। तलवार ने बताया कि सरकार की ओर से एमएसएमई सेक्टर में किए गए सुधार के अच्छे नतीजे दिख रहे हैं और यही कारण है कि यह सबसे ज्यादा नौकरियां देने वाला सेक्टर बन गया है। सरकारी स्कीमों और वित्तीय मदद से स्वरोजगार में भी इजाफा हुआ है। कुल जॉब में 51% हिस्सेदारी एमएसएमई सेक्टर के लिए उत्साहजनक है लेकिन बेरोजगारों के लिए यह निराशाजनक है। विशेषज्ञों का वेतन लगातार घटता जा रहा है और अब यह 50 हजार रुपए प्रतिमाह के नीचे आ गया है। 

कितने प्रतिशत लोगों से नौकरी छोड़ी पूछा ही नहीं

इस सर्वे की सबसे बड़ी खामी यह रही कि इस अवधि में हासिल कितनी नौकरियां कायम रहीं और कितने लोगों ने जॉब छोड़ दिया इस सवाल का जवाब तलाशा ही नहीं गया। हालिया रिपोर्टों में ये दावे किए जाते रहे हैं कि प्राइवेट सेक्टर में हायरिंग और फायरिंग का चलन तेजी से बढ़ा है जबकि सरकारी स्तर पर कॉन्ट्रैक्ट जॉब में इजाफा हो रहा है। ये दोनों ही बेरोजगारों के लिए चिंता का कारण हैं।