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बंदे ने गंदगी के खिलाफ केस ठोक दिया, कोर्ट ने कमिश्नर का 1 साल का वेतन मुआवजे में दिलाया | CONSUMER FORUM

14 April 2019

मामला उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ का है। उपभोक्ता फोरम (CONSUMER FORUM) ने शहर में व्याप्त गंदगी, छुट्टा जानवरों का जमावड़ा, खुले सीवर टैंक, मच्छरों का प्रकोप, टूटी हुई सड़कें एवं सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण जैसी तमाम जन समस्याओं को संज्ञान में लिया है। लखनऊ उपभोक्ता फोरम के न्यायिक अधिकारी राजर्षि शुक्ला ने नगर निगम को लापरवाही के लिए दोषी ठहराया। साथ ही 15 दिनों में इन समस्याओं से निजात दिलाने का आदेश भी पारित किया है। इन सबके इतर, नगर आयुक्त डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी को आदेश दिया गया है कि वह एक वर्ष का वेतन शिकायत दर्ज कराने वाले डॉ. आनंद अखिला को दें। 

टैक्स देते हैं तो सुविधाएं क्यों नहीं

बता दें कि लखनऊ शहर में गंदगी, अतिक्रमण समेत तमाम समस्याओं को वैज्ञानिक डॉ. आनंद अखिला ने मई 2017 में जिला उपभोक्ता फोरम लखनऊ के सामने (वाद संख्या-197/17) रखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि वह नगर निगम को नियमित रूप से हाउस टैक्स और वॉटर टैक्स देते हैं और यह उनका अधिकार बनता है कि नगम निगम उन्हें एक उपयुक्त और स्वच्छ वातावरण मुहैया कराए। डॉ. आनंद अखिला ने साक्ष्यों के माध्यम से शहर की बदहाल स्थिति कोर्ट के सामने रखी, जिन पर गौर करने के बाद बेंच ने नगर निगम के जवाबों को नकार दिया। 

सिर्फ वीआईपी क्षेत्रों में होती है फॉगिंग

न्यायिक अधिकारी राजर्षि शुक्ला और अरविंद कुमार की बेंच ने आदेश में कहा कि बीमारियों, गंदगी और आवारा कुत्तों द्वारा लोगों को काटने, छोटे बच्चों को मार डालने की खबरें आए दिन ही आती रहती हैं। सब्जियों और फलों के कूड़े को खाने के लिए गाय, सांड जैसे पशु आवारा घूमते रहते हैं। कई बार ये आवारा पशु लोगों को भी चोटिल कर देते हैं। मच्छरों का प्रकोप भी दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, जिससे डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू से सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती है। इन सभी जिम्मेदारियों से नगर निगम खुद को अलग नहीं कर सकता है। आम उपभोक्ता की गाढ़ी कमाई से दिया गया टैक्स शहर, मोहल्ले और उनके घर की सफाई के लिए ही है। बेंच ने प्रमुख रूप से पार्कों और सार्वजनिक स्थानों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी जगहों पर फॉगिंग न होने से छोटे बच्चों को बहुत खतरा रहता है। कोर्ट ने यह भी पाया कि फॉगिंग सिर्फ वीआईपी क्षेत्रों में ही की जाती है। 

नहीं माना आदेश तो की जाएगी सख्त कार्रवाई 

न्यायिक अधिकारी राजर्षि शुक्ला ने राष्ट्रीय आयोग के एक फैसले का हवाला देते हुए नगर आयुक्त को खूब लताड़ लगाई, जिसमें राष्ट्रीय आयोग ने म्यनुनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली को दोषी माना था। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि आदेश का पालन 15 दिन में न किया गया तो डॉ. आनंद अखिला उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 27 के तहत कानून प्रक्रिया के लिए अधिकृत होंगे। 



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