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संविदा कर्मचारियों को नियमित क्यों नहीं किया जा सकता: हाईकोर्ट ने पूछा | MP NEWS

भोपाल। मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि म.प्र. सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्था विभाग द्वारा जिला सहकारी बैंकों में डाटा एन्ट्री आपरेटरों के पदों पर नियमित पदों पर नई भर्ती की जा रहीं हैं तथा पहले से संविदा पर कार्यरत डाटा एन्ट्रीं आपरेटरों को नियमित नहीं किया जा रहा है। 

आयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं द्वारा 1 मार्च 2019 को आदेश जारी किया गया है कि 30 जून 2019 तक आपकी सेवाएं अंतिम हैं के निर्णय के विरोध में म.प्र. सहकारिता विभाग के अंतर्गत जिला सहकारी बैंक राजगढ़ में संविदा पर कार्य करने वाले कम्प्यूटर आपरेटर खुशहाल सिंह, जगदीश गुर्जर, रवि सोजनिया, नीरज मालाकार, राकेश प्रजापति, उमेश बरेठा, गोपाल नागर, लोकपाल सिंह, संदीप यादव जो कि कम्प्यूटर आपरेटरों के पद जिला सहकारी बैंकों में कार्यरत थे के द्वारा नियमित पदों पर पहले कार्यरत संविदा कर्मचारियों को प्राथमिकता दिये जाने के सबंध में लगाई गई याचिका में कर्मचारियों के वकील विवेक फड़के के द्वारा की गई पैरवी में म.प्र. हाईकोर्ट की इंदौर हाईकोर्ट बैंच के जज माननीय विवेक रूसिया ने म.प्र. सरकार से पूछा है कि जब सरकार ने 5 जून 2018 को समस्त विभागों के संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की नीति बनाई है तथा विभाग में पद भी नियमित खाली पद भी मौजूद हैं, विभाग उन पदों पर अन्य लोगों की नियमित भर्ती कर रहा है तो वर्षो से डाटा एन्ट्री आपरेटर जो संविदा पर जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों में कार्य कर रहे हैं ऐसे संविदा कर्मचारियों को 5 जून 2018 में म.प्र. शासन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा बनाई गई नियमितीकरण की नीति के अनुसार उनको नियमित क्यों नहीं किया जा सकता है, इसका जवाब 90 दिन में सरकार एक स्पीकिंग आर्डर जारी कर कारण सहित बताए। 

गौरतलब है कि म.प्र. जिला सहकारी बैंकों में म.प्र. सहकारिता विभाग द्वारा 18 जून 2018 में कम्प्युटर आपरेटरों के नियमित पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की गई। इन्हीं बैंकों में पहले से जो संविदा कम्प्युटर आपरेटर कार्यरत थे उनको किसी प्रकार की प्राथमिकता नहीं दी गई जबकि 5 जून 2018 को म.प्र. शासन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा संविदा कर्मचारियों के नियिमतीकरण की नीति एवं शर्ते बना दी गई थीं उसके बाद भी सहकारिता विभाग द्वारा की जा रही भर्तियों में अनेक खामियां होने के बावजूद जिसकी शिकायत म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ एवं जिला सहकारी बैंक संविदा लिपिक कंम्प्युटर आपरेटर महासंघ द्वारा म.प्र. शासन  के समस्त अधिकारियों को करने के बावजूद ताबड़तोड़ तरीके से भर्ती कर ली गई और पहले से संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को सेवा से बाहर करने के निर्देश जारी कर दिये गये जिसका विरोध म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ तथा जिला सहकारी बैंक संविदा लिपिक कम्प्युटर आपेरटर महासंघ ने किया था । लेकिन तात्कालीन सरकार और उसमें बैठे हुये अधिकारियों ने एक ना सुनी उसके बाद संविदा कम्प्यूटर आपरेटरों ने माननीय उच्च न्यायालय की इंदौर हाईकोर्ट बैंच में याचिका लगाई गई जिसमें संविदा कर्मचारियों की और से विवेक फड़के ने पैरवी की तथा माननीय न्यायधीश विवेक रूसिया ने याचिका पर म.प्र. शासन को निर्देश जारी किये हैं ।