CHICKEN POX जैसी बीमारियों से बचने के लिए इस माह करें ये उपाय | HEALTH TIPS

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CHICKEN POX जैसी बीमारियों से बचने के लिए इस माह करें ये उपाय | HEALTH TIPS

नई दिल्ली। चैत्र माह के कृष्णपक्ष की सप्तमी व अष्टमी तिथि के दिन शीतला माता (CHICKEN POX) की पूजा की जाती है। इस पूजा का मुख्य उद्देश्य परिवार के सदस्यों को छोटी माता (Smallpox) और चेचक जैसी बीमारियों से पीडि़त होने से बचाना है। शीतला सप्तमी (Sheetla Saptami) की पूजा मुख्य रूप से मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और गुजरात में बड़े पैमाने पर की जाती है, अन्य राज्यों में भी परंपरानुसार शीतला सप्तमी तो कहीं शीतला अष्टमी (Sheetla Ashtami) की पूजा की जाती है। शीतला सप्तमी पर्व का वर्णन स्कंद पुराण में बताया गया है। इसके अनुसार देवी शीतल को दुर्गा और पार्वती का अवतार माना गया है और इन्हें रोगों से उपचार की शक्ति प्राप्त है।  इस वर्ष यह पूजा 27 व 28 मार्च को होगी। 

इन रोगों से दिलाती हैं मुक्ति


मां शीतला को खसरा, माता निकलने(चेचक), पीलिया, मोतीझरा, बोदरी (Jaundice, Motijara, Bodri) आदि रोगों से मुक्ति देने वाली देवी माना गया है। इन बीमारियों में ठंडी और बासी चीजे ज्यादा लाभप्रद है। गर्म और छोकन वाली चीजे इन बीमारियों को ज्यादा बढ़ाती है। इसी कारण मां को एक दिन पहले बनी हुई चीजो का भोग लगाकर घरों मे खाई जाती है। मां की पूजा के बाद ही इन पकवानों को खाने की शुरुआत की जाती है।

 ये सावधानियां रखें


ऐसी मान्यता है कि इस दिन के बाद बासी भोजन करना रोगों को आमंत्रण करने जैसा होता है। शीतलाष्टमी के बाद बासी भोजन करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्या आती है। इसी कारण इस दिन बासी भोजन का भोग लगता है फिर इस दिन के बाद से ताजा भोजन ही किया जाता है। घर में अगर किसी व्यक्ति को चिकन पॉक्स निकली है तो उस व्यक्ति का खास ध्यान रखना चाहिए, सबसे पहले उसे कमरा अच्छी तरह साफ हो और ताजा हरा नीम रखें, साफ बर्तन में लाइट भोजन देना चाहिए। साफ उबला हुआ पानी पीने के लिए ही दें। अपनी प्रतिरक्षा तंत्र को सुदृढ रखने के लिए भोजन में हरी सब्जियों और ताजा फलों का समावेश करें। बिना नाश्ता किए घर से बाहर ना निकलें।

चुल्हा जलाना वर्जित


शीतला सप्तमी व अष्टमी के दिन घरों चुल्हा जलाना वर्जित माना गया है। स्कंद पुराण में शीतला माता के विषय में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। शीतला माता के हाथों में कलश, सूप, मार्जन(झाडू) तथा नीम के पत्ते धारण किए होती हैं तथा गर्दभ की सवारी किए यह अभय मुद्रा में विराजमान हैं।