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पाकिस्तान की सेना ने कहा, भारत से युद्ध नहीं लड़ पाएंगे इसे टालें | WORLD NEWS

28 February 2019

नई दिल्ली। पाकिस्तान के आधिकारिक सूत्र ने भारत की न्यूज ऐजेंसी को बताया है कि पाकिस्तान की सेना ने सरकार के सामने स्पष्ट कर दिया है कि वो जम्मू-कश्मीर सहित राजस्थान या किसी अन्य बॉर्डर पर युद्ध लड़ने के लिए तैयार नहीं है। पाकिस्तान की सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी क्षमताएं काफी कम हैं और यदि युद्ध हुआ तो एक बार फिर पराजय का मुंह देखना होगा। इसके तत्काल बाद पीएम ऑफिस ने शांति वार्ता की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। 

सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तान में बुधवार को सबसे ज्यादा हलचल इस्लामाबाद के रेड जोन एरिया और मुजफ्फराबाद आर्मी सेंटर में थी। रेड जोन एरिया में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान का ऑफिस कंस्टीट्यूशन एवेन्यु है। यहां सुबह 8:30 बजे से सैन्य अफसरों और मंत्रियों के आने-जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। यहां मंगलवार से भी ज्यादा हलचल थी, जब भारतीय एयरफोर्स ने बालाकोट पर हमला किया था। आवाजाही के बीच विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को छोड़कर बाकी किसी की गाड़ी ज्यादा देर नहीं रुकी। 

पाकिस्तान पीएम पर दवाब, युद्ध की स्थिति को टालें

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पर दवाब बन गया है कि वो किसी भी तरह की रणनीति इस्तेमाल करके युद्ध की स्थिति को टाल दें। इसी के चलते पाकिस्तान की तरफ से कहा गया कि पीएम इमरान खान ने भारत के सामने शांति वार्ता का जो प्रस्ताव रखा है, अगर भारत उसे मानता है तो अभिनंदन को छोड़ दिया जाएगा। 

चीन भी पाकिस्तान के साथ नहीं, सबने अकेला छोड़ दिया

मंगलवार को हुई सिक्युरिटी काउंसिल की मीटिंग से पहले पाक पीएम ने विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को दूसरे देशों के विदेश मंत्रियों से बात करने को कहा था, ताकि पता चले कि युद्ध की स्थिति में कौन-कौन साथ खड़ा है। इस बातचीत में कुरैशी को किसी देश ने खुलकर सहयोग नहीं करने की बात कही। चीन ने भी खुलकर सहयोग से मना कर दिया। अमेरिका ने भी सख्ती ही दिखाई। सारा अपडेट विदेश मंत्री ने एनएसी मीटिंग से पहले इमरान को दिया। 

सेना प्रमुख बाजवा ने हाई लेवल वॉर से इंकार किया

इन सबके बीच बुधवार को हुई नेशनल कमांड अथॉरिटी (एनसीए) की मीटिंग में सेना प्रमुख बाजवा ने हाई लेवल वॉर टालने की अपील की। इसी मीटिंग में पाकिस्तान की तरफ से शांति प्रस्ताव रखने का फैसला हुआ। इसको लेकर भारत से संपर्क साधने और बाकी देशों को इस बारे में बताने की जिम्मेदारी भी शाह को दी गई है। इसी को देखते हुए शाह ने जापान सहित अपने 3 विदेश दौरे कैंसिल कर दिए हैं। करीब 10 साल बाद ऐसा हुआ है जब एनएसी की मीटिंग रिव्यू से आगे बढ़कर किसी खास मकसद के लिए बुलाया गई।



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