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50 हजार वाली इलेक्ट्रिक साइकिल 12000 में कैसे बनाई, क्षितिज ने बताया | ENGINEERING INNOVATION

उज्जैन। आमतौर पर चीजे पुरानी या खराब हो जाने पर हम फेंक देते हैं लेकिन शहर के युवा इंजीनियर ने कबाड़ की चीजों से ही इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार की है, जो एक बार चार्ज होने पर 30 किलोमीटर तक चलेगी। खास बात यह है कि कबाड़ से बनाई इस साइकिल की लागत बाजार में मिलने वाली इलेक्ट्रिक साइकिल से एक चौथाई है। इस नवाचार को अब युवा इंजीनियर अपने नाम से पेटेंट कराएंगे।

इलेक्ट्रिक साइकिल कैसे बनाएं

कुशलपुरा में रहने वाले क्षितिज ज्वेल ने यह इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार की है। साल 2014 में क्षितिज ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियर में अपनी डिग्री पूरी की और वर्तमान में वह पीथमपुर के एक सोलर प्रोजेक्ट के प्लांट हेड हैं। क्षितिज ने बताया बाजार में 30 से 50 हजार रुपए तक की लागत में मिलने वाली इलेक्ट्रिकल साइकिल को देखकर उन्हें कम लागत में साइकिल तैयार करने का आइडिया आया। एक कबाड़ी से उन्होंने 800 रुपए में एक भंगार साइकिल, 2700 रुपए में डीसी मोटर व प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) कंट्रोलर सहित कुल 8500 में बैटरी व अन्य सामान खरीदे।

15 दिन में इन्हीं कबाड़ सामग्रियों से क्षितिज ने इलेक्ट्रिकल साइकिल तैयार कर ली। क्षितिज ने बताया पंखे के रेगुलेटर का इस्तेमाल एक्सीलेटर के रूप में करते हुए इसे पीसीबी से जोड़ा। साथ ही मोटर को भी पीसीबी से जोड़ दिया। पहिये की ताड़ियों के बीच में एक फ्री-व्हील को जोड़कर मोटर फिट की। बैटरी से इन्हें कनेक्ट करते हुए एक्सीलेटर के नीचे एक बटन लगाया है। जैसे ही बटन को दबाते हैं तो बैटरी चालू हो जाती है और एक्सीलेटर देते ही इलेक्ट्रिक साइकिल बगैर पैडल चलाए चलने लगती है।

फीचर्स क्या हैं

40 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम स्पीड तक यह साइकिल चल सकती है। डेढ़ घंटे में इसकी बैटरी फुल चार्ज होती है। एक बार चार्ज करने पर साइकिल 30 किलोमीटर तक चल सकती है। क्षितिज ने कहा जल्द ही इसके पेटेंट की प्रक्रिया को पूरा करके इसके डिजाइन देश-विदेश की बड़ी साइकिल कंपनियों को भेजे जाएंगे। बैटरी नहीं होने पर यह आसानी से पैडल से भी चलाई जा सकती है।

इंडिकेटर देता है बैटरी चार्ज करने का सिग्नल

इलेक्ट्रिक साइकिल में आगे लगाई गई बैटरी को चार्ज करना पड़ता है। एक भंगार लंच बॉक्स में बैटरी को साइकिल में ही लगाया गया है। इसकी चार्जिंग क्षमता को 20-20 प्रतिशत के पांच भागों में बांटते हुए छोटे एलईडी बल्ब लगाए गए हैं। प्रत्येक बल्ब का जलना 20 प्रतिशत बैटरी होने का सिग्नल देता है। जैसे ही केवल एक बल्ब जलना बाकी रह जाएगा तो बैटरी को चार्ज करना होगा। इन लाइट्स को देखकर बैटरी चार्ज करने का सिग्नल चालक को मिलता रहेगा।

इको फ्रेंडली साइकिल चोरी होने पर भी बताएगी लोकेशन

इलेक्ट्रिक साइकिल से किसी भी तरह का प्रदूषण नहीं होगा। इको फ्रेंडली इस साइकिल की खासियत यह है कि इसके चोरी होने के बाद भी यह 72 घंटे तक अपनी लोकेशन देती रहेगी। क्षितिज ने बताया साइकिल की सीट के नीचे जीपीएस से जोड़ते हुए एक सिम लगाई है। सिम को 72 घंटे के बैकअप वाली एक छोटी बैटरी आैर एक अन्य मोबाइल नंबर से जोड़ा है। चोरी होने पर अगर इसकी मुख्य बैटरी को बंद भी कर दिया जाए तो यह साइकिल दूसरे मोबाइल नंबर पर 72 घंटे तक अपनी लोकेशन बताती रहेगी।