अब सेवादल की यूनिफार्म बदलेगी, चाकरी नहीं करेंगे | NATIONAL NEWS

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अब सेवादल की यूनिफार्म बदलेगी, चाकरी नहीं करेंगे | NATIONAL NEWS

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को जमीनी स्तर पर टक्कर देने के लिए INC के सेवादल संगठन भी पूरी तैयारी में है। इसके युवा कार्यकर्ता अब नीली जींस, सफेद टी-शर्ट और सेवादल लिखी कैप पहने नजर आएंगे। वहीं गांव-गांव, वर्ड स्तर पर सेवादल को सक्रिय करने के लिए पदाधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो नए सदस्य तैयार करेंगे। इसके लिए शिविर लगाएंगे और युवाओं को राष्ट्रधर्म का प्रशिक्षण देकर उन्हें कांग्रेस की नीतियों से जोड़ेंगे। 

मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मिली जीत से कांग्रेस को एक संजीवनी दे दी है। माना जा रहा है कि पार्टी की इस जीत में सेवादल का भी अहम योगदान है। संगठन की इस अहमियत को समझते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव से पूर्व सेवादल को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। ताकि, वह भी संघ परिवार को जमीनी स्तर पर जवाब दे सके। सेवादल के युवा कार्यकर्ता स्मार्ट नजर आएं। इसके लिए नई ड्रेस भी तय कर दी गई है। अब तक कार्यकर्ता सफेद पेंट-शर्ट व सेवादल का बैच तथा सेवादल अंकित टोपी पहनते थे, लेकिन यंग सेवादल के 14 से 24 वर्ष के युवा कार्यकर्ता नीली जींस, सफेद टी-शर्ट तथा सफेद कैप पहने हुए दिखेंगे। युवा महिला कार्यकर्ता भी यही ड्रेस पहनेंगी। 

सेवादल कार्यकर्ता न ही सेल्यूट मारेंगे, न ही पानी भरेंगे 

सेवादल का कार्यकर्ता न तो अब नेताओं को सेल्यूट मारेंगे और न ही कांग्रेस के कार्यक्रमों में पानी भरने या पिलाने का काम करेंगे। वे आत्मसम्मान के साथ कांग्रेस को मजबूती देंगे। सेवादल का कार्यकर्ता कांग्रेस की रीढ़ है। अब गांव-गांव में शाखाएं भी लगाई जाएंगी। 

क्यों और कैसे हुई सेवादल की स्थापना

1923 से पहले आजादी के आंदोलन में शामिल कांग्रेस के कार्यकर्ता जेल जाते और माफीनामा लिखकर बाहर आ जाते थे। झंडा सत्याग्रह के दौरान 1921 में हार्डीकर और उनके मित्रों की राष्ट्र सेवा मंडल ने जब माफी मांगने से मना कर दिया तो उन पर कांग्रेस के बड़े नेताओं की निगाह गई। तभी यह सोचा गया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण की जरूरत है। नागपुर सेंट्रल जेल में उन्होंने एक ऐसा संगठन बनाने का निश्चय किया जो कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर उनमें फौजी अनुशासन और लड़ने का माद्दा पैदा कर सके। हार्डीकर जेल से बाहर आने के बाद इलाहाबाद जाकर नेहरू से मिले और सत्य व अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले लड़ाका संगठन की स्थापना पर चर्चा हुई। इसके बाद 1923 में कर्नाटक में आयोजित कांग्रेस सम्मेलन में सरोजनी नायडू ने हिंदुस्तानी सेवादल बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके पहले चेयरमैन नेहरू बनाए गए। इसी संगठन को बाद में कांग्रेस सेवादल के रूप में जाना गया।