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MPPEB आवेदन की स्क्रूटनी तक नहीं करता, सिर्फ उम्मीदवारों को सिरदर्द देता है | MP NEWS

17 January 2019

भोपाल। प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) अब किसी काम का नहीं रह गया है। वो ना तो भर्ती के नियम बनाता, ना परीक्षाओं केंद्र के लिए जिम्मेदार है। इतना ही नहीं वो उम्मीदवारों के आवेदन पत्रों की स्क्रूटनी तक नहीं करता। ऑनलाइन फार्म में फिल्टर तक नहीं लगाए जाते। कोई भी व्यक्ति फीस चुकाकर परीक्षा में शामिल हो सकता है। ऐसे में अयोग्य उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हो जाते हैं और मेरिट लिस्ट पर कब्जा भी कर लेते हैं। पीईबी सिर्फ एक काम करता है वो केवल प्रश्नपत्र तैयार करवाता है और नॉर्मलाइजेशन करता है। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रश्नपत्र भी पूरी तरह से सही नहीं होता। 

आवेदन पत्रों की स्क्रूटनी एक बड़ी समस्या बन गई है। स्क्रूटनी ना होने के कारण कोई भी आवेदन कर रहा है और मेरिट लिस्ट पर उनका कब्जा भी हो रहा है। ऐसे में योग्य उम्मीदवार या तो वेटिंग पर चले जाते हैं या वेटिंग से भी बाहर हो जाते हैं। बाद में जब विभाग स्क्रूटनी करता है तो अयोग्य की झंटनी होती है परंतु वेटिंग​ लिस्ट वाले परेशान होते रहते हैं। उन्हें चयन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। 

किस तरह के आवेदन निरस्त करता है पीईबी
उम्मीदवार ऑनलाइन फॉर्म भरते समय गलत जानकारी देकर ऐसे पदों के लिए भी दावेदारी कर देते हैं जिसकी योग्यता उनके पास होती नही हैं। वही, पीईबी, अभी सिर्फ हस्ताक्षर और फोटो आदि में त्रुटि होने पर ही आवेदन निरस्त किए जाते हैं। शासन के नियम भी ऐसे हैं कि सत्यापन पीईबी स्तर पर नहीं किया जाता। उम्मीदवारों का कहना है कि परीक्षा से पहले ही सत्यापन कर लिया जाए तो अयोग्य उम्मीदवारों को पहले ही बाहर किया जा सकता है। 

पीईबी की गलती का खामियाजा उम्मीदवार भुगतते हैं
यह एक बड़ा कारण है कि पीईबी की ग्रुप-2 सब ग्रुप-4 की परीक्षा 2017 के परिणामों के आधार पर कुल 307 पदों में सिर्फ 74 पद भरे गए। हांलाकि, शेष 233 पद वेटिंग लिस्ट से भरे जा सकते थे लेकिन, उम्मीदवारों का आराेप है कि अधिकारियों द्वारा सभी पदों के लिए एक समान भर्ती प्रक्रिया आयोजित नहीं की गई। सहायक नगर निवेशक अधिकारी और अतिक्रमण अधिकारी के लिए वेटिंग लिस्ट से एक ओर 250 से 350 उम्मीदवारों को ही मौका दिया। जबकि, पीईबी से आरटीआई में प्राप्त वेटिंग लिस्ट में ही 10 हजार उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं, इन्हें अवसर नहीं दिया गया। दूसरी ओर राजस्व निरीक्षक और स्वच्छता निरीक्षण के लिए वेटिंग लिस्ट में शामिल 11-11 हजार उम्मीदवारों को अवसर दिया गया। 

नई परीक्षा के स्थान पर वेटिंग वालों को बुलाना चाहिए
उम्मीदवारों का कहना है कि खाली पदों पर भर्ती के लिए नई परीक्षा कराने के स्थान पर इसी परीक्षा के रिजल्ट की वेटिंग में शामिल योग्य उम्मीदवारों को मौका दिया जाए। क्योंकि, अधिकारियों की मनमर्जी के कारण वेटिंग लिस्ट में पद के अनुरूप मांगी गई योग्यता वाले सभी उम्मीदवारों को मौका नहीं मिला है। इस संबंध में इन्होंने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग आयुक्त काे ज्ञापन सौंपा है। उम्मीदवारों ने बताया कि पूर्व मंत्री माया सिंह ने भी वेटिंग लिस्ट से भर्ती करने को कहा था। 

पीईबी : इस तरह हुई भर्ती प्रक्रिया 
1- सहायक नगर निवेशक के 12 पद के लिए सिर्फ 250 उम्मीदवारों की वेटिंग लिस्ट जारी कर इन्हें बुलाया। लेकिन, इनके पास अर्बन प्लानर की स्नातक की डिग्री नहीं थी। इसलिए 1 पद नहीं भरा सका । 

2- सहायक अतिक्रमण निराेधक अधिकारी के 51 पद थे। मेरिट एक पद भरा गया। इसके बाद सिर्फ 350 उम्मीदवारों की वेटिंग लिस्ट जारी कर इन्हें बुलाया। इससे एक भी योग्य उम्मीदवार नहीं मिला। इसके लिए भी अर्बन प्लानिंग की स्नातक की डिग्री मांगी गई थी। 

3- राजस्व निरीक्षक के 33 पद थे। स्वच्छता निरीक्षण 151 पद थे (इसमें स्वच्छता निरीक्षण नगर निगमों के लिए और स्वच्छता निरीक्षक मप्र राज्य नगरीय स्वच्छता सेवा मिलाकर)। खास बात यह है कि इनके लिए पहले एक-एक हजार उम्मीदवार बुलाए । वहीं, वेटिंग लिस्ट से 10-10 उम्मीदवारों को बुलाया गया। इसके बाद भी मेरिट व वेटिंग से राजस्व निरीक्षक के लगभग 7 पद भरे गए। स्वच्छता निरीक्षक के लगभग 55 पद भरे गए। 



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