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अध्यापक संघर्ष समिति की सरकार और शिक्षकों से अपील | KHULA KHAT by Ramesh Patil

04 January 2019

रमेश पाटिल/प्रान्तीय कार्यकारी संयोजक /अध्यापक संघर्ष समिति मध्यप्रदेश। अध्यापक भेद रहित शिक्षा विभाग में संविलियन चाहता है। जिसमें शिक्षा विभाग की तमाम सेवाशर्तें, सुविधाएं, शास्तीयां, पदनाम जो शिक्षक संवर्ग को लागू है वह सब अध्यापकों को शिक्षा विभाग में संविलियन उपरांत लागू होनी चाहिए साथ ही सेवा अवधि शिक्षाकर्मी, संविदा शाला शिक्षक नियुक्ति दिनांक से मान्य होनी चाहिए। इसमें गुरूजी संवर्ग की वरिष्ठता का भी सम्मानजनक हल हो क्योंकि अध्यापक जानता है की प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि मान्य होने पर ही ग्रेच्युटी (उपादान) के पूरे लाभ का पात्र वह हो पायेगा। उसे भविष्य में आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और एक बड़ी अध्यापकों की संख्या पुरानी पेंशन/पारिवारिक पेंशन की कानूनन पात्र हो जाएगी साथ ही शेष अध्यापकों के लिए भी पुरानी पेंशन/पारिवारिक पेंशन बहाली के रास्ते खुल जाएंगे।

समस्त शैक्षणिक कर्मचारी पूर्व प्रचलित विभाग अर्थात शिक्षा विभाग और अनुसूचित जनजाति विभाग के अधीन होंगे तो शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में भी सुविधा होगी तथा विभिन्न विभागों के टकराव से भी बचा जा सकेगा। विभिन्न विभागों के टकराव का ही दुष्परिणाम है कि अध्यापकों का ना स्थानांतरण हो पा रहा है, ना ही पति-पत्नि का निकटस्थ स्थानों पर समायोजन हो पा रहा है। विभागीय टकराव के कारण ही अनार्थिक मुद्दो पर भी अध्यापकों को अभी तक संतुष्ट नही किया जा सका है। तमाम प्रकार के अव्यवहारिक प्रयोग किये जाने के बावजूद शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने में भी विशेष सुधार परिलक्षित नही हो पाया है। शिक्षा विभाग की सम्पूर्ण सेवाशर्तों के साथ अध्यापकों का शिक्षा विभाग, अनुसूचित जनजाति विभाग में संविलियन होने पर छोटी समस्याए जो अब बहुत बड़ी हो गई है जैसे स्थानांतरण एवं पति-पत्नि समायोजन की समस्या स्वतः ही समाप्त हो जाएगी, अनुकंपा नियुक्ति और अतिथि शिक्षको के नियमितीकरण  के रास्ते खुल जायेगे और संतुष्ट अध्यापक शैक्षणिक गुणवत्ता बढाने में पूरे मनोयोग से समर्पित हो पायेगा।

शैक्षणिक गतिविधियों को छोड़ केवल और केवल अध्यापकों की हितचिंतन छोड राजनीति करने वाले अध्यापक नेता शासन पर आर्थिक भार का बवंडर खड़ा कर शासन में भय व्याप्त कर अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन को असंभव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं राज्य शिक्षा सेवा को लागू करने की बात कर रहे हैं।ऐसे अध्यापक नेता अब अध्यापकों में बेनकाब हो चुके है। वे भयग्रस्त है कि कही राजनीतिक दुकान बंद न हो जाए? यह सर्वविदित है कि किसी भी क्षेत्र या विभाग में समान कार्य करने वाले अलग-अलग वर्गों का अस्तित्व शोषण को बढ़ावा देती है। इसलिए मध्यप्रदेश का आम अध्यापक, अध्यापक संघर्ष समिति मध्यप्रदेश और समान विचारधारा वाले अध्यापक संघ वर्ग रहित शिक्षा विभाग में संविलियन की मांग करते रहे हैं और उसे पाने की आशा भी उनके मन में जागृत हो चुकी है क्योंकि सरकारी दल के वचन पत्र में अध्यापको की मंशा को ससम्मान रखा गया है।

यह सच है कि अपने संपूर्ण सेवाकाल में अध्यापकों का भारी आर्थिक शोषण हुआ है। इसके बावजूद अध्यापक संघर्ष समिति मध्यप्रदेश और समान विचारधारा वाले अध्यापक संघ सरकार पर आर्थिक बोझ डालना नहीं चाहते है। वह केवल सितंबर 2013 से छठवां वेतनमान और जनवरी 2016 से राज्य शासन के अन्य कर्मचारियों की भांति सातवां वेतनमान मय एरियस (अवशेष राशि) मिले चाहता है ताकि आर्थिक शोषण से लम्बे समय से लडते आ रहे अध्यापकों के चेहरों पर सेवाकाल के उत्तरार्द्ध में थोड़ी मुस्कुराहट आ सके और इसको दिये जाने से शासन पर कोई विशेष आर्थिक भार भी नहीं आने वाला है बल्कि संपूर्ण अध्यापक संवर्ग में संतुष्टि का भाव आ जाएगा कि हमारे साथ न्याय हुआ है जो कि सरकार की बड़ी उपलब्धि होगी।

अध्यापकों की मंशा बिल्कुल स्पष्ट है कि हम शैक्षणिक कर्मचारी हैं और बगैर किसी चिंता के शैक्षणिक दायित्वों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करना चाहते हैं। इसके लिए उसके मन में सेवाकालीन और सेवा उपरांत सामाजिक सुरक्षा का भाव होना चाहिए। यह तभी हो सकता है जब बगैर किसी भेदभाव के अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन हो। अध्यापक बिल्कुल नहीं चाहता है कि मध्यप्रदेश का शिक्षा क्षेत्र आंदोलन-हड़ताल की रणभूमि बने। वह चिंतामुक्त होकर नौनिहालों के भविष्य को सुधारने में शत-प्रतिशत योगदान देना चाहता है। शिक्षा विभाग में संविलियन के लिए वातावरण बन चुका है। सरकारी दल पूरे विश्वास के साथ वचन दे चुका है। अध्यापक चाहता है कि शिक्षा विभाग में संविलियन के नेक काम में अब देरी नहीं होनी चाहिए। वह लोकसभा की आचार-संहिता लगने के पूर्व शिक्षा विभाग में संविलियन के लिए मानसिक तौर पर तैयार मान चुका है। अब सरकार की इच्छा शक्ति पर निर्भर है कि कैसे वह अध्यापकों को दिए गए वचनों का शीघ्रता से क्रियान्वयन करती है और कैसे इस कार्य को करने में अधिकारी वर्ग से तालमेल स्थापित कर इस पूरी प्रक्रिया को बाधा रहित बनाती है।

अध्यापक स्पष्ट करना चाहता है कि शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षक संवर्ग के लिए वह पूरे गरिमामय सम्मान का भाव पहले से रखता है। शिक्षा विभाग में संविलियन होने पर वह शिक्षक संवर्ग की वरिष्ठता और गरिमा को बनाये रखने का पक्षधर है और ऐसी ही अपेक्षा शिक्षक संवर्ग से करता है कि शिक्षा विभाग को जीवित रखने का प्रयास अध्यापक कर रहा है इसलिए इस महती कार्य में शिक्षक संवर्ग सहयोगात्मक योगदान देकर अपने बडे होने का परिचय दे।
रमेश पाटिल
प्रान्तीय कार्यकारी संयोजक
अध्यापक संघर्ष समिति मध्यप्रदेश



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