ENGINEERING COLLEGES को घाटे से उबारने ये ट्रिक यूज करने वाली है AICTE | EDUCATION NEWS

08 January 2019

भोपाल। पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश के साथ-साथ देशभर में इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटें खाली रह जाती है। इस कारण धीरे-धीरे इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या तेजी से घट गई। अब इस समस्या को देखते हुए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद एआईसीटीई एक नया प्रयास करने जा रहा है। अब जिन इंजीनियरिंग कॉलेजों में आधी से अधिक सीटें खाली रह जाएंगी, वह कॉलेज अपने यहां बीए और बीएससी जैसे कोर्स शुरू कर सकेंगे। इससे कॉलेज के संसाधनों का सही तरह इस्तेमाल हो सकेगा और इन इंजीनियरिंग कॉलेजों को बंद करने की नौबत नहीं आएगी। 

AICTE ने इस संबंध में सभी कॉलेजों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें बताया है कि कई इंजीनियरिंग कॉलेज काउंसिलिंग के बाद अपनी सीटें पूरी नहीं भर पाते हैं, इसलिए कैंपस में बीए और बीएससी जैसे कोर्सेज शुरू करने की इजाजत दी है। इन कॉलेजों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे छात्रों और शुरू होने वाले बीए और बीएससी जैसे कोर्स के छात्रों के लिए प्लेग्राउंड और बाकी जगह एक हो सकते हैं। इन कोर्स को शुरू करने से पहले अनुमति लेना आवश्यक है। 

पहले की मोटी कमाई, अब घाटे में BUSINESS

कई इंजीनियरिंग कॉलेज काउंसिलिंग के बाद अपनी सीटें पूरी नहीं भर पाते हैं, इसलिए उन्हें नए कोर्स शुरू करने की इजाजत दी गई है। इससे संसाधनों का सही तरह इस्तेमाल होगा और इन कॉलेजों को बंद करने की नौबत नहीं आएगी। कॉलेजों को संबंधित विवि और उच्च शिक्षा निदेशालय से भी अनुमति लेनी पड़ेगी। 

बस इतनी सी औपचारिकता पूरी करनी होगी

इंजीनियरिंग कॉलेज में नए कोर्स शुरू करने से पहले अनुमति लेना आवश्यक है। इसके लिए एआईसीटीई के अप्रूवल के साथ ही इंजीनियरिंग कॉलेजों को यूजीसी जैसे संबंधित नियामकों से अन्य प्रकार की स्वीकृतियां लेनी पड़ेंगी। कॉलेजों को संबंधित विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा निदेशालय से भी अनुमति लेनी इसमें आवश्यक होगी। इसके बाद ही वे अपने कैंपस में इस तरह के नए कोर्स शुरू कर सकेंगे। इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और संबंधित नियामकों से अनुमति के बिना वे ऐसे कोर्स संचालित नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा BSC कोर्स शुरू करने से पहले संस्थान को संबंधित प्रयोगशाला और उपकरणों के बारे में बताना होगा। 

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