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सरकारी कर्मचारियों के लिए RSS बैन का ग्राउंड तलाश रहे हैं अफसर | MP NEWS

28 December 2018

भोपाल। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस के प्रति अनुराग रखने वाले अफसर कम से कम सरकारी कर्मचारियों के लिए RSS बैन करने का ग्राउंड तलाश रहे हैं। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ खुद को एक सामाजिक राष्ट्रवादी संगठन बताता है परंतु पिछले कुछ सालों में भाजपा के साथ आरएसएस की सत्ता में भागीदारी और आरएसएस पदाधिकारियों द्वारा भाजपा का खुलेआम प्रचार यह प्रमाणित कर गया ​कि RSS भाजपा के लिए जमीन तैयार करने वाला एक ऐसा संगठन है जो खुद को गैर राजनैतिक कहते हुए राजनीति में पूरी तरह से संलिप्त रहता है। 

कांग्रेस के वचन पत्र में भी है ऐलान
चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के घोषणा पत्र में इस बात का ऐलान किया गया है कि सरकारी परिसरों में आरएसएस की शाखाओं पर प्रति​बंध लगाया जाएगा। बता दें कि देश के कई राज्यों में ऐसे प्रतिबंध लागू हैं परंतु मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार ने आरएसएस के कार्यक्रमों के लिए सरकारी मैदान एवं परिसरों के उपयोग की अनुमति दे दी थी। 

मंत्री ने दी कर्मचारियों को धमकी
वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री सज्जन सिंह ने कहा है कि दंड भोगने से अच्छा है कि सरकारी कर्मचारी शाखा में न जाएं। माना जा रहा है कि अब ऐसे सभी सरकारी कर्मचारियों को टारगेट किया जाएगा जो RSS की शाखाओं में नियमित रूप से जाते हैं एवं आरएसएस की गणवेश में नजर आते हैं। 

ये कर्मचारियों की राजनीति है
दरअसल, ये कर्मचारियों की राजनीति है। पिछले 15 साल मध्यप्रदेश में भाजपा का शासन रहा। इस दौरान आरएसएस से जुड़े कर्मचारियों ने काफी मनमानी की। हालात यह थे कि कुछ मामलों में तो कलेक्टर और प्रमुख सचिव भी प्रतिनियुक्ति का आनंद उठा रहे तृतीय श्रेणी कर्मचारी की प्रतिनियुक्ति तक समाप्त नहीं कर पाए थे। कुछ सरकारी कर्मचारी जो आरएसएस के पदाधिकारी भी थे, ने कलेक्टरों के साथ अभद्र व्यवहार भी किया। 



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