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वरिष्ठों की उपेक्षा कर राजा साहब ने बेटे और भांजे को मंत्री बनाया, अच्छा नहीं किया: बिसाहूलाल समर्थकों ने कहा | MP NEWS

राजेश शुक्ला/अनूपपुर। मंत्रीमंडल के गठन में तीन वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर दिग्विजय सिंह ने अपने बेटे व भांजे को मंत्रिमंडल में शामिल कराने के साथ अपने समुदाय के लोगो को अधिक स्थान दिलाना इसके साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ व ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने-अपने समर्थकों को मंत्री बनाने के चक्कर में वरिष्ठों को जानबूझकर कर किनारे कारने का प्रयास इनके द्वारा किया गया है। जबकि 15 सालो का सूखा खत्म करने मे वरिष्ठ नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

विंध्य में जहां रीवा, शहडोल व उमरिया से कांग्रेस का सूपड़ा साफ है वही सतना से तीन सीटो पर संतोष करना पड़ा किन्तु प्रदेश के अंतिम छोर का अनूपपुर जिला वरिष्ठ कांग्रेस नेता बिसाहूलाल सिंह के नेतृत्व मे भाजपा का सूपड़ा साफ करा दिया और तीनों सीट पर कांग्रेस का परचम लहराया, इसके बावजूद भी मंत्रीमंडल मे अनूपपुर जिले की उपेक्षा सिर्फ इसलिए की गई कि राजा साहब के पुत्र व भांजे को कैबिनेट मंत्री बनाना है। 

केजरीवाल को छोड़ दे तो अभी तक इतिहास में ऐसा देखने को नही मिला कि कोई राज्यमंत्री न बना हो। क्या करे राजा साहब को खुश करना है। मुख्यमंत्री कमलनाथ तो एक मुखौटा है पर्दे के पीछे दिग्विजय सिंह की चाल है। मंत्रीमंडल के गठन के बाद मुख्यमंत्री के बगल मे बैठ कर मंत्रियो को दिशा-निर्देश देना यह साबित करता है कि असली कमान दिग्विजय के हाथ में है। 

कांग्रेस पर अबतक लग रहे आरोप भी सही साबित हुए यह पार्टी सामंतवादी विचारधारा के साथ कुछ लोगो के लिये परिवार की बपौती है। जिन्हे राज्यमंत्री बनाया जाना चाहिए उन्हे कैबिनेट स्तर दे कर अपनी किरकिरी कराने मे अमादा है। इसी असंतुष्टा के कारण अभी तक मंत्रियों को विभागों की जिम्मेंदारी नही सौंपी जा सकीं।

विधानसभा में कांग्रेस के लिए पहली लड़ाई अध्यक्ष को लेकर होगी जिसमे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एन.पी.प्रजापति को इस पद के लिए ला कर उन्हे खुश करने का प्रयास किया जा रहा है जिसके लिए तैयारी प्रारम्भ कर दी गई है किन्तु यह आसन नही होगा भाजपा इस पद के लिए अपना उम्मीदवार उतार रही है अगर असंतुष्टों ने साथ दिया तो कांग्रेस यही हार का सामना करना पड़ सकता है। 

वही भोपाल सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने अब उन वरिष्ठों को मंत्री बनाने का मन बनाया है जिन्हे किनारे कर दिया गया था किंतु जानकारों का यह कहना है कि यह सब दिग्विजय सिंह का फार्मूला हो सकता असंतोष को शांत कर किसी तरह विधानसभा मे बहुमत हासिल करना है फिर अपनी फितरत के अनुसार इन्हे किनारे कर दिया जायेगा या यह भी कह सकते है कि वरिष्ठों को झुनझुना पकड़ा कर बहुमत हासिल करना मकसद है।