मध्यप्रदेश: अब कैदियों को कोर्ट पेशी पर नहीं ले जाया जाएगा | MP NEWS

31 December 2018

वैभव श्रीधर/भोपाल। मध्य प्रदेश की किसी भी जेल से कैदी अब पेशी के लिए अदालत नहीं ले जाए जाएंगे। जेल से सीधे ब्राडबैंड से अदालत जुड़ेगी और सुनवाई होगी। जेल विभाग ने इसके पूरे इंतजाम कर लिए हैं। एक जनवरी से यह व्यवस्था लागू होगी। इससे लगभग 1200 पुलिसकर्मियों के समय की बचत होगी, जिनका उपयोग दूसरे कामों में हो सकेगा। खुली जेलों में फिलहाल यह व्यवस्था लागू नहीं होगी।

पेशी के लिए जेल ले जाते वक्त कैदियों के बीच मारपीट होने के साथ सुरक्षा में सेंध लगने का खतरा भी रहता था। परिजन सुरक्षाकर्मियों से सेटिंग कर न सिर्फ कैदियों से मिल लेते थे, बल्कि उन्हें कुछ सामग्री और पैसे भी दे देते थे। कैदियों को जेल से अदालत ले जाने में रोजाना 1200 पुलिस के जवानों की ड्यूटी लगती थी और परिवहन में खर्च भी करना पड़ता था।

इस स्थिति को देखते हुए हाई कोर्ट ने जेल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की व्यवस्था बनवाने का निर्णय लिया था। सरकार ने इस व्यवस्था को बनाने की जिम्मेदारी जेल विभाग को सौंपी। विभाग ने 125 जेलों में सुनवाई के लिए 216 नए कमरे बनवाए और कैमरे लगाए। बीएसएनएल से ब्रांडबैंड कनेक्शन लिए और इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से उपकरण लेकर व्यवस्था बनाई।

साढ़े तीन करोड़ रुपए में बनी व्यवस्था
जेल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एक जनवरी से पेशी की नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसे बनाने में साढ़े तीन करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए गए हैं। इसमें 1.70 करोड़ रुपए के उपकरण और इतने ही कक्ष बनवाने सहित अन्य कार्यों में लगाए गए।

हाई कोर्ट की निगरानी में हुआ काम
जेल विभाग के सचिव राजीव दुबे ने बताया कि हाई कोर्ट के निर्देश पर पेशी की नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इस काम को समयसीमा में पूरा करने की निगरानी भी हाई कोर्ट द्वारा की जा रही है। इस व्यवस्था से लगभग 1200 पुलिसकर्मियों के समय की बचत होगी। इनकी ड्यूटी रोजाना प्रदेशभर की जेलों से कैदियों को पेशी के लिए अदालत ले जाने में लगी है।

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