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एमपी विधानसभा चुनाव 2013 नोटा को कितने वोट मिले थे, यहां पढ़िए

22 November 2018

2013 के विधानसभा चुनाव में 26 विधानसभा क्षेत्र ऐसे थे, जहां जीत-हार का अंतर 2500 या इससे कम मत का था। वहीं, नोटा का मिले वोटों की संख्या प्रभावशाली थी। यदि हारने वाले प्रत्याशी के वोटों में नोटा की संख्या जोड़ दी जाए तो परिणाम पलट सकते थे। विधानसभा चुनाव  2013 में 6 लाख 43 हजार 144 मतदाताओं ने मौजदू प्रत्याशियों की जगह नोटा में वोट देकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। सर्वाधिक 39 हजार 235 नोटा के अधिकार का इस्तेमाल छिंदवाड़ा जिले में हुआ था।

फरवरी 2018 में मुंगवली विधानसभा सीट के लिए हुए उप चुनाव में कांग्रेस ने 2123 वोटों से जीत हासिल की थी, वहीं 2253 वोट नोटा के निकले थे। यदि ये वोट भाजपा को मिल गए होते तो नतीजा पलट जाता। 2013 के चुनाव नतीजों को देखा जाए तो सुरखी में भाजपा की पारूल साहू 141 मतों से जीती थीं और नोटा में 1558 वोट दर्ज हुए थे। इसी तरह ग्वालियर पूर्व में 2112 वोट नोटा में गए थे, जबकि माया सिंह (नगरीय विकास मंत्री) मात्र 1147 वोटों से जीती थीं। जबलपुर पूर्व, जबलपुर पश्चिम और बरघाट भी ऐसे ही विधानसभा क्षेत्र थे।

आमतौर पर माना जाता है कि नोटा का इस्तेमाल शहरी क्षेत्रों में ज्यादा होता है पर 2013 के चुनाव नतीजों ने इस मिथक को तोड़ दिया। सर्वाधिक 9412 नोटा के विकल्प को उपयोग छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव विधानसभा के मतदाताओं ने किया। इसके बाद पानसेमल में 9288, अमरवाड़ा में 8232, भैंसदेही में 7929, बड़वानी में 7430, शहपुरा में 7214, मानपुर में 6262, घोड़ाडोंगरी में 5926, जोबट में 5689, आमला में 5465 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया।



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