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शिवराज सिंह के साले: सिर्फ कांग्रेस का टिकट हाथ में रह गया, पूरी पार्टी खिसक गई | MP NEWS

26 November 2018

भोपाल। मध्यप्रदेश में इस बार आम जनता और आम कार्यकर्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आम जनता ने सवाल करना शुरू कर दिया है और आम कार्यकर्ता ने सबक सिखाना। स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि अब उन पर कुछ भी थोपा नहीं जा सकता। वो सवाल करते हैं और यदि उनके साथ चाल चली गई तो वो भी चाल चल सकते हैं। पढ़िए, वारासिवनी में क्या कुछ हो रहा है शिवराज सिंह के साले संजय सिंह मसानी के साथ। 

यहां बात बालाघाट जिले की वारासिवनी तहसील की हो रही है। सीएम शिवराज सिंह चौहान के साले संजय सिंह मसानी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। लोग कहते हैं कि दोनों के रिश्तों में कोई खटास नहीं आई है। केवल टिकट कांग्रेस का है। कमलनाथ ने बड़े ही गर्व के साथ मसानी को कांग्रेस का टिकट दिया था परंतु अब मसानी के हाथ में सिर्फ टिकट ही रह गया है। वारासिवनी में पूरी कांग्रेस पार्टी, बागी प्रत्याशी प्रदीप जायसवाल के साथ नजर आ रही है। अब कमलनाथ भी किस किस को निष्कासित करेंगे। 
  
मसानी के लिए कांग्रेस का टिकट पाना जितना आसान था, जीतना उतना नहीं है। उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं भाजपा के मौजूदा विधायक योगेन्द्र निर्मल और कांग्रेस के दमदार बागी प्रदीप जायसवाल, जो इसी सीट से पहले तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। रणक्षेत्र में मसानी अकेले खड़े नजर आते हैं। कांग्रेस का झंडा उठाकर, कमलनाथ की तस्वीरों से सजे मंच पर पंजा के लिए वोट मांगने वाले मसानी कहते हैं- “यहां कांग्रेस नहीं लड़ रही है।” क्षेत्र के ज्यादातर कांग्रेस वर्कर बागी उम्मीदवार के लिए काम कर रहे हैं। कांग्रेस का एक भी बड़ा नेता अब तक वारासिवनी में झांकने भी नहीं आया है।

मसानी इस इलाके को पिछले पांच साल से सेव रहे थे। वे वैसे तो महाराष्ट्र में गोंदिया के रहने वाले हैं पर अपने बहनोई के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही उन्होंने पड़ोसी बालाघाट को अपना कार्यक्षेत्र बनाया है। काफी अरसे से वे वारासिवनी को पोस रहे थे, जहां वे बुजुर्गों और शिक्षकों के पांव पखारने से लेकर गरीबों की आंख के ऑपरेशन कराने तक में भिड़े रहते थे पर ऐन मौके पर भाजपा ने टिकट देने से मना कर दिया। वे बताते हैं कि कांग्रेस में जाने के पहले वे अपनी मां को साथ लेकर बहनोई से मिलने भी गए थे- “मैंने उनको बताया था, धोखे में रखकर नहीं गया।”



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