CM शिवराज सिंह ने रूठे पुजारियों को मनाने किए 2 ऐलान | MP NEWS

05 October 2018

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव से पहले रूठे पुजारियों को मनाने के लिए 2 बड़े ऐलान किए हैं। उन्होंने सभी पुजारियों का मानदेय बढ़ा दिया है और उन्हे संबल योजना के लिए पात्र हितग्राही घोषित कर दिया है। बता दें कि मध्यप्रदेश के पुजारियों की सिर्फ एक मांग है कि मंदिरों को पहले की तरह कलेक्टरों के नियंत्रण से मुक्त कराया जाए। शिवराज सरकार ने सभी मंदिरों का सरकारी करण कर दिया है। पुजारी इसका विरोध कर रहे हैं। बीते रोज पुजारियों ने प्रदर्शन किया तो उन्हे गिरफ्तार कर लिया गया था। 

इसके बाद जारी आदेशों के अनुसार समस्त शासकीय मंदिरों के पुजारियों और सेवादारों को संबल योजना का लाभ दिया जायेगा। पुजारियों के मानदेय भी तीन गुना वृद्धि की गई है, जिससे उन्हें तीन हजार रूपये प्रति माह तक मानदेय मिलेगा। उनका वर्ष में दो बार नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण भी होगा और आवश्यकतानुसार चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। पुजारियों की नियुक्ति पृथक्करण प्रक्रिया और मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना पात्रता प्रावधानों में भी पुजारियों की अपेक्षानुसार संशोधन किया गया है।

राज्य शासन द्वारा जारी आदेशानुसार ऐसे शासन संधारित मंदिर, जिनके पास कृषि भूमि नहीं है, उन मंदिरों के पुजारियों को तीन हजार रूपये प्रति माह की दर से मानदेय प्राप्त होगा। जिन मंदिरों के पास पाँच एकड़ तक कृषि भूमि है, उन मंदिरों के पुजारियों को 2100 रूपये प्रति माह की दर से मानदेय का भुगतान मिलेगा। ऐसे मंदिर जिनके पास पाँच से दस एकड़ तक कृषि भूमि है, उन मंदिरों के पुजारियों को 1560 रूपये प्रति माह और दस एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले मंदिर के पुजारियों को 500 रूपये प्रति माह मानदेय मिलेगा।

शासन संधारित जिन मंदिरों के पास दस एकड़ तक कृषि भूमि है, ऐसे मंदिरों की कृषि भूमि से होने वाली आय का उपयोग पुजारी स्वयं के लिये कर सकेंगे। दस एकड़ से अधिक कृषि भूमि की नीलामी जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि के मार्गदर्शन में पुजारी स्वयं कर सकेंगे। इससे होने वाली आय मंदिर के खातों में जमा की जायेगी।

शासन द्वारा पुजारियों और कथावाचकों की नियुक्ति, पृथक्करण और नामांतरण की व्यवस्था में भी संशोधन किया गया है। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को रख-रखाव के लिये नियुक्त पुजारियों, कथावाचकों की नियुक्ति, पृथक्करण और नामांतरण के लिये अधिकृत किया गया है।

मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में भी शासन संधारित मंदिरों के पुजारियों को लाभान्वित करने में आयु सीमा का बंधन समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ ही समस्त शासकीय मंदिरों के पुजारियों और सेवादारों को मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना में सम्मिलित किया गया है। शासन द्वारा जिन मंदिरों के रखरखाव के लिये एक हेक्टेयर से कम भूमि प्रदान की गयी है, वहाँ के ऐसे सभी पुजारियों और सेवादारों का संबल योजना में पंजीयन किया जायेगा। जो आयकर दाता और शासकीय सेवा में नहीं हैं।
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