गांधी जयंती: यकीनन गांधीजी के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप.... | GANDHI JAYANTI

01 October 2018

देश को आजादी दिलाने वाले हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अहिंसा के परिचायक थे। देश को गुलामी की जंजीर से आजादी दिलाने वाले हमारे बापू का योगदान जगत विदित है। अहिंसा परमो धर्म के सिद्धांत पर चलकर उन्होंने देश को एकजुट करके आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने की प्रेरणा दी। उन्होंने हर देशवासी को अहसास दिलाया था कि स्वतंत्रता की लड़ाई सबकी लड़ाई है। 

यूं तो गांधीजी के बारे में आपने अब तक बहुत कुछ सुना होगा, जाना होगा और पढ़ा भी होगा। लेकिन कुछ ऐेस राज हैं, जो आप उनके बारे में नहीं जानते होंगे। गांधी जयंती के मौके पर आज हम आपको गांधीजी के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे राज बताने जा रहे हैं, जिन्हें सुनकर आप दंग रह जाएंगे। यकीनन उनसे जुड़े ये राज काफी दिलचस्प हैं। तो चलिए जानते हैं। 

इतने चर्चित शख्सियत होने के बाद भी वे अपने जीवनकाल में कभी प्लेन में नहीं बैठे थे। वे सादा जीवन जीने पर यकीन करते थे, इसलिए वे अक्सर पैदल या फिर स्टीमर से यात्रा करना पसंद करते थे। 

बहुत कम लोगों को पता है कि महात्मा गांधी की हैंडराइटिंग बेहद खराब थी। यहां तक की लॉ स्कूल की टीचर्स भी हमेशा उनकी राइटिंग को लेकर शिकायत करते थे। 

गांधीजी ने अपने जीवन के पांच साल केवल फल और नट्स खाकर बिताए थे। लेकिन हेल्थ प्रॉब्लम के चलते फिर उन्होंने वेजीटेरियन डाइट लेना शुरू किया। 

गांधीजी दूध से बने प्रोडक्ट का विरोध करते थे। लेकिन स्वास्थ्य खराब होने 

के बाद उन्होंने बकरी का दूध पीना शुरू किया था। आपको जानकर हरत होगी कि कई बार तो गांधीजी यात्रा पर जाते समय बकरी को अपने साथ ले जाते थे, ताकि वे जहां भी हों, उन्हें ताजा दूध मिले। वे गाय और भैंस का दूध पीना पसंद नहीं करते थे। 

बचपन में गांधीजी काफी शर्मीले थे। कई बार तो वे स्कूल से भाग आते थे, सिर्फ इसलिए कि उन्हें किसी से बात करना पसंद नहीं था। 

उन्हें पैदल चलना बहुत पसंद था। वह दिन में 10 मील रोजाना पैदल चलते थे। डांडी यात्रा के दौरान उन्होंने 241 मील का सफर तय किया था, तब उनकी उम्र 60 साल थी। 

गांधीजी के दांत नकली थे। जिनका इस्तेमाल वे सिर्फ खाना खाते वक्त करते थे। 

गांधीजी इंग्लिश को इरिश के साथ मिलाकर बोलते थे, क्योंकि उनके पहले टीचर इरिश थे। 

लंदन में रहते हुए वे सूट, टोपी पहनते थे, लेकिन जब उन्होंने भारत में गरीबी देखी तो उन्होंने लक्जरी पहनावा त्यागकर केवल धोती धारण करने का निर्णय लिया। 
बापू काफी दिलदार थे। एक बार ट्रेन में सफर करने के दौरान उनका एक जूता ट्रेन से बाहर गिर गया, तो उन्होंने दूसरा जूता भी फेंक दिया, ये सोचकर कि किसी जरूरतमंद की मदद हो जाएगी।

गांधीजी अपने जीवनकाल में कभी अमेरिका नहीं गए, बावजूद इसके कई अमेरिकी उनके प्रशंसक थे।

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