10 अक्टूबर से शुरू हो रही हैं "नवरात्रि", जानिए माँ के 9 रूपों की महिमा

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10 अक्टूबर से शुरू हो रही हैं "नवरात्रि", जानिए माँ के 9 रूपों की महिमा

नवरात्रि (navratri) की तैयारियां घरों और मंदिरों में शुरू हो चुकी हैं। हिंदू धर्म में नवरात्रि पर देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व है। इस त्योहार पर देवी मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है। हर रूप और हर नाम में एक दैवी शक्ति को पहचानना ही नवरात्रि मनाना है। नवरात्रि पर्व की नौ रातें देवी मां के नौ रूपों को समर्पित हैं, जिसे हम नवदुर्गा भी कहते हैं। तो चलिए जानते हैं मां के 9 रूपों (9 forms of navdurga) की महिमा के बारे में। 

शैलपुत्री
मां दुर्गा के 9 रूपों में पहला स्वरूप शैलपुत्री के नाम से पहचाना जाता है। शैल का मतलब शिखर से है। शास्त्रों में शैलपुत्री को पर्वत की बेटी के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। 

ब्रह्माचारिणी
नवदुर्गा के दूरे स्वरूप का नाम है ब्रह्माचारिणी। जिसका ना कोई आदि हो और न अंत हो, उसे ब्रह्माचारिणी कहते हैं। 

चंद्रघंटा
दुर्गा का तीसरा स्वरूप मां चंद्रघंटा हैं।  हिंदू धर्म में तीसरे दिन की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। चंद्र हमारी बदलती हुई भावनाओं का प्रतीक है, वहीं घंटा का अर्थ मङ्क्षदर के घंटे से है। मां के मस्तक में घंटे के आकार का अर्धच्रदं है, इसलिए मां के इस रूप में चंद्रघंटा कहते हैं। 

कुष्मांडा
चौथा रूवरूप मां कुष्मांडा का है। इस दिन देवी कुष्मांडा देवी की उपासना की जाती है। कुष्मांडा का अर्थ है कि देवी मां हमारे अंदर प्राणशक्ति के रूप में प्रकट रहती  है। अपनी मंद हंसी द्वारा ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कुष्मांडा पड़ा। 

स्कंदमाता
मां का पांचवा स्वरूप है स्कंदमाता। स्कंद भगवान कार्तिकेय को कहा जाता है। इनकी माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से भी जाना गया। ये कमल के आसन पर विराजमान हैं, इसलिए इन्हें पद्मासन भी कहते हैं। 

कात्यायनी
मां का छठां रूवरूप है कात्यायनी। महर्षि कात्यायन की पुत्री होने के कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। 

कालरात्रि
सांतवे दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इनकी महिमा भी अपार है। देखने में कालरात्रि का रूवरूप बहुत भयानक है, लेकिन हमेशा ये शुभ फल देने के लिए मानी जाती हैं। 

महागौरी
अष्टमी का दिन मां गौरी को समर्पित है। इनकी पूजा करने से भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं। 

सिद्धिदात्री
आखिरी दिन नवमी पर सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री जीवन में अद्भुत सिद्धि, क्षमता प्रदान करती हैं। सिद्धि का अर्थ ही संपूर्णता है। ये आपको सबकुछ पूर्णता के साथ करने की शक्ति प्रदान करती हैं। यानि आप किसी भी कार्य को करें , वह संपूर्ण हो जाए यहीं सिद्धी है। सिद्धि आपके जीवन के हर स्तर में संपूर्णता प्रदान करती  है, यही सिद्धिदात्री की महत्ता है।