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10 टन चांदी से बना माता का मंडप, 40 करोड़ आई लागत | Navratri festival attraction

कोलकाता। अपने भव्य पंडालों की वजह से देश-दुनिया में पहचाने जाने वाले पश्चिम बंगाल में बेशुमार दौलत खर्च कर भव्य पंडालों को आकार दिया गया है। संतोष मित्र सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति ने 40 करोड़ रुपये की लागत से चांदी का मंडप तैयार किया है। इस मंडप में सोने की कारीगरी की गई है। इस पंडाल का उदघाटन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने किया। पंडाल निर्माण में 10 टन चांदी प्रयुक्त हुई है।

बापाई सेन नामक कारीगर ने बनाया

इसी तरह से एक पंडाल को रंग, रुई, पेन या पेंसिल नहीं, बल्कि 90 लाख कीलों से तैयार किया गया है। इस पंडाल में कलाकृतियों को आकर्षित बनाने के लिए चम्मच, बाल्टी, बेलचा और कुप्पी का इस्तेमाल किया गया है। यह हैरतअंगेज कारनामा बापाई सेन नामक कारीगर ने किया है। बागुईआटी के बंधुमहल क्लब के पूजा पंडाल में समाज की अच्छाइयों और बुराइयों को प्रदर्शित करने की कोशिश की गई है।

पूजा पंडाल का थीम 'न कठिन न सख्त, निर्माण करें प्रदूषण मुक्त बंगाल


यहां नारी उत्पीड़न, डेंगू के प्रति जागरुकता, शराब विरोधी अभियान, प्रदूषण और सर्वधर्म समन्वय जैसे मुद्दों को दर्शाया गया है। पूजा कमेटी के अध्यक्ष पार्थ सरकार ने बताया कि इस बार पूजा पंडाल का थीम 'न कठिन न सख्त, निर्माण करें प्रदूषण मुक्त बंगाल' रखा गया है। समाज को जागरुक करने और संदेश देने के इरादे से ही कारीगर बापन मंडल की मदद से औरों से हटकर पूजा पंडाल का निर्माण किया गया है।

प्रतिमा व पंडाल दर्शन के लिए बड़ी संख्या में जमावड़ा


पार्थ ने आगे कहा कि सरकार अकेले कानून बनाकर सभी समस्याओं को समाधान नहीं कर सकती है। इसमें जागरुकता सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है, इसीलिए कील की मदद से विभिन्न समस्याओं को तस्वीरों के जरिये प्रदर्शित करने का प्रयास किया है। वर्तमान में नारी उत्पीड़न समाज में सबसे बड़ी समस्या है। समाज को आगे ले जाने के लिए शिक्षा और शांति की भी सख्त जरुरत है। पूजा के दौरान प्रतिमा व पंडाल दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा होता है। इस तरह उन्हें जागरुक करने में आसानी होगी।
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