MPPSC में महिला आरक्षण फॉर्मूले पर विवाद, अधिक अंक पाकर भी महिला सूची से बाहर | MP NEWS

29 August 2018

भोपाल: एमपी पीएससी द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के रिजल्ट के साथ ही आरक्षण फॉर्मूले पर बखेड़ा खड़ा हो गया है। एक बार फिर महिला आरक्षण का फॉर्मूला विवाद में है। पीएससी ने सोमवार-मंगलवार को विभिन्न विषयों के कट ऑफ अंक जारी किए। कई विषयों के नतीजों में पुरुष के कट ऑफ अंक कम और महिलाओं के लिए कट ऑफ अंक ज्यादा हैं। यानी कम अंक पाकर पुरुष चयनित हो रहे हैं लेकिन उनसे ज्यादा अंक पाने वाली महिलाएं बाहर हो गईं। 

पीएससी द्वारा लागू किए गए महिला आरक्षण का यह उल्टा असर आरक्षित वर्गों के अंदर नजर आ रहा है। यानी अनारक्षित श्रेणी में महिलाओं के लिए कट ऑफ कम ही है, जबकि एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणियों में महिलाओं का कट ऑफ पुरुषों के मुकाबले ज्यादा दिखाई दे रहा है। हिंदी, कॉमर्स, अंग्रेजी, जियोलॉजी जैसे विषयों में ऐसा हुआ है। जैसे हिंदी में एससी वर्ग का कट ऑफ 354 है, जबकि एससी महिला का कट ऑफ इससे दो अंक ज्यादा 356।

यानी एससी श्रेणी में महिला 355 अंक पाकर भी चयन सूची से बाहर हो गई हैं लेकिन पुरुष 354 पर सिलेक्ट हो गए। हिंदी में ओबीसी का कट ऑफ 366 है लेकिन ओबीसी महिला का 367 है। इसी तरह अंग्रेजी विषय की चयन सूची के अनुसार एसटी श्रेणी में कट ऑफ 160 है लेकिन महिलाओं का कट ऑफ इस श्रेणी में 272 है। यानी यहां एसटी पुरुष तो 160 अंक पाकर चयन होते हैं लेकिन 271 अंक पाने वाली महिला सूची से बाहर होगी। कॉमर्स विषय में भी ऐसा हुआ है। एसटी श्रेणी में 142 कट ऑफ के मुकाबले एसटी महिला का कट ऑफ 152 अंक है।

आयोग पर आरोप

शिकायतकर्ता सुनीता जैन ने आरोप लगाया है कि आयोग ने मनमाने तरीके से महिला-पुरुष के कट ऑफ अलग-अलग तय कर महिलाओं के मौलिक अधिकारों का हनन किया है। आरक्षण के कारण महिलाओं को लाभ मिलने के बजाय उलटा इससे नुकसान हो रहा है। यानी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के नाम पर पुरुषों के लिए 67 प्रतिशत आरक्षण लागू हो गया है।

महिला आरक्षण लागू करने में पीएससी द्वारा लागू क्षैतिज (हॉरिजेंटल) आरक्षण के कारण ऐसा हो रहा है। इसमें महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण श्रेणीवार आरक्षण के भीतर ही दिया जा रहा है। यानी श्रेणी में आरक्षित कुल सीटों में से 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए रखी गई हैं। इसका मतलब है कि सिर्फ इन्हीं सीटों पर महिलाओं की नियुक्ति की जाएगी। इससे हो ये रहा है कि महिला आरक्षित सीटों की संख्या कम होती है, लिहाजा उनके कट ऑफ ऊपर चले जाते हैं, जबकि पुरुष सीटों की संख्या ज्यादा होने पर उनके कट ऑफ नीचे चले जाते हैं। विरोध कर रही महिलाओं की मांग है कि ज्यादा अंक पाने वाली महिलाओं को पहले ओपन सीटों पर गिना जाए, फिर अलग से 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। पीएससी ने इससे इंकार कर दिया है। ऐसा हुआ तो कई श्रेणियों में सभी सीटों पर महिलाएं ही चयनित हो जाएंगी।

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