मप्र: 8 जिलों में पानी ही पानी, दुकान, मकान, सड़कें सब डूब गए | MP NEWS

22 August 2018

इंदौर। उज्जैन, धार, मंदसौर, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन एवं बड़वानी में बारिश ने त्राहि त्राहि मचा दी है। कई इलाकों में पानी भर गया है। नदियों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई। कुछ शहरी इलाकों में पानी भरा है। घर और दुकानें डूब रहे हैं। बारिश लगातार जारी है। नागदा में चामुंडा माता मंदिर जलमग्न हो गया है। उज्जैन में घाट के नजदीक बने मंदिर जलमग्न हो गए हैं। 

मंदसौर में लगातार जारी बारिश से गरोठ में मकान की दीवार ढह गई, जिसमें दबकर 4 लोग घायल हो गए। 
तेज बारिश से शिवना नदी उफान पर है। 
मल्हारगढ़ और नारायणगढ़ में निचली बस्तियों में घरों में पानी घुस गया है। 
मल्हारगढ़ के रेतम बैराज बांध में जल स्तर बढ़ने से बुधवार को 7 गेट खोलने पड़े। 
मल्हारगढ़-जीरन सड़क मार्ग का संपर्क टूट गया है। 
धार और घाटा बिल्लौद में हुई भारी बारिश के बाद उज्जैन जिले के नागदा में चंबल नदी उफान पर आ गई है। 
चंबल के उफान पर आने से चामुंडा माता मंदिर जलमग्न हो गया है। 
उज्जैन में भी शिप्रा के उफान पर आने से घाट के समीप मौजूद मंदिर डूब गए हैं।

मंदसौर: सड़कों पर 3 फीट पानी 
मंदसौर में पूरे जिले में रातभर से बारिश का दौर जारी है। तेज बारिश के बाद मल्हारगढ़ में निचली बस्तियों में पानी घुस गया है। बांडा खाल में सड़क पर तीन फीट तक पानी भर गया, जिससे घरों में पानी घुस गया। पुराने बाजार में भी कमर तक पानी भर गया, जिससे ईदगाह जाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मल्हारगढ़ के रेतम बैराज बांध में जलस्तर बढ़ने से बुधवार को 7 गेट खोल दिए गए। वहीं मल्हारगढ़ से रेलवे स्टेशन जाने वाला मार्ग भी बंद हो गया है। ग्राम पटलावद में पुल पर पानी आने से स्कूली बच्चों को लोगों ने नदी पार करवाया। वहीं खजूरी रुंडा मैं तेज बारिश से नदी-नाले उफान पर आ गए हैं। अंसार नदी पर बना पुल पानी में डूब गया है, जिस कारण बरड़िया-अमरा से बालोदा मार्ग में आवाजाही बंद हो गई।

गरोठ में दीवार ढह गई, 4 लोग दबे
मंदसौर के गरोठ में तेज बारिश के बाद बुधवार को मेघवाल मोहल्ले में मकान की दीवार ढह गई। दीवार गिरने से परिवार के चार लोग दब गए, जिन्हें लोगों ने एंबुलेंस 108 की मदद से अस्पताल पहुंचाया। हादसे में बंशीलाल मेघवाल उनकी पत्नी मांगीबाई बेटा भविष्य और ऋषि घायल हो गए।  प्राथमिक इलाज के बाद मांगीबाई, भविष्‍य और ऋषि को झालावाड़ रैफर कर दिया गया।

कालीबावड़ी-मांडू मार्ग बंद रहा 
24 घंटे से जारी बारिश से खुज नदी उफान पर आ गई। जिससे कालीबावड़ी-मांडू मार्ग स्थित पुलिया से होकर पानी निकला। जिससे चार घंटे मार्ग बंद रहा। क्षेत्र के साकल्दा डैम के आठ दिन पूर्व ही बारिश से लबालब होने से वहां का पानी खुज नदी से होकर धरमपुरी स्थित नर्मदा में जा रहा है। कालीबावड़ी-चंदावड़ मार्ग तीन घंटे तक बंद रहा। कालीबावड़ी छितरी मार्ग स्थित खुज नदी की पुलिया की एक और की मिट्‌टी बहने से लोगों को भीलट मंदिर होकर सिंगाड़पुरा मार्ग से उमरबन-धामनोद रूट से होकर जाना पड़ा।  

इंदौर में तालाब के दो गेट खुले
सोमवार शाम छह बजे से मंगलवार रात तक 26 घंटे में 42.7 मिमी पानी बरस चुका है। इससे यशवंत सागर में सालभर की जरूरत का पानी आ गया है। 19 फीट क्षमता वाले इस तालाब के लगातार पानी अाने से दो गेट खोल दिए गए हैं। वहीं अन्य तालाब भी आधे से ज्यादा भर गए हैं। अब तक 549.7 मिमी (21.6 इंच) पानी गिर चुका है। हालांकि अब भी यह इस वक्त की औसत बारिश से कम है। गौरतलब है कि 21 अगस्त तक 605 मिलीमीटर (23.81 इंच) बारिश होनी चाहिए।

खंडवा: कई इलाकों में पानी भरा, बाजार और मंदिर जलमग्न
24 घंटों से जारी बारिश के कारण छोटी आबना नदी भी उफान पर रही। 24 घंटों में जिले में 4.3 इंच बारिश दर्ज की गई। खंडवा शहर में 24 घंटों के दौरान करीब चार इंच बारिश हुई। तेज बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया। रेलवे स्टेशन रोड पर इक्का-दुक्का होटल और राधाकृष्ण मंदिर में पानी भर गया। पड़ावा क्षेत्र में एक व्यावसायिक कॉम्पलेक्स के बेसमेंट में दो दिन से पानी भरा है। बारिश के कारण आबना सहित अन्य नदी-नाले उफान पर रहे। पंधाना रोड पर छोटी आबना नदी का पानी किनारे बसे कुछ घरों तक पहुंच गया। इससे लोगों की चिंता बढ़ गई। लोगों को सबसे अधिक परेशानी सड़कों पर गड्ढों में बारिश का पानी भरने से हुई। इस साल 1 जून से अब तक 21.4 इंच बारिश हुई है। पिछले साल इस अवधि तक 21.7 इंच बारिश दर्ज की गई थी। इस मान से पिछले साल की तुलना में बारिश का आंकड़ा अब भी 0.3 इंच कम है।

खरगोन: बांध के दो गेट आधा फीट खोलने पड़े
खरगोन में तेज बारिश का सिलसिला जारी है। 24 घंटे में साढ़े तीन इंच बारिश दर्ज हुई। अब तक 22.11 इंच बारिश हो चुकी है। पिछले साल 17.58 इंच बारिश हुई थी। भगवानपुरा में देजला देवाड़ा जलाशय भराव क्षमता 50.29 क्यूबिक मीटर के साथ ओवरफ्लो हो गया है। जलाशय से 9 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होती है। उधर, अपरवेदा बांध का जलस्तर 315.500 मीटर पर है। बांध के दो गेट आधा फीट खोलने पड़े हैं।

बड़वानी: गोई, डेब, रूपा, नहाली नदियों में बाढ़ का पानी
शहर सहित जिले में पिछले 24 घंटे से अच्छी बारिश हो रही है। अब तक जिले में 20 इंच बारिश हो चुकी है। अच्छी बारिश होने के साथ ही जिले के 105 तालाबों में से 24 तालाब पूरे भर चुके हैं। वहीं इंदिरा सागर बांध सात मीटर और ओंकारेश्वर बांध क्षमता से चार मीटर खाली है। इस साल 70 प्रतिशत कोटा सावन में ही पूरा हो चुका है। नर्मदा के जलस्तर में भी वृद्धि हो रही है। बारिश के कारण गोई नदी, डेब नदी, रूपा नदी, नहाली नदियों में बाढ़ का पानी आया। अब जिले में औसत बारिश का कोटा पूरा होने में महज 10 इंच की कमी बची है। जिले की औसत बारिश 30.41 इंच है।

बुरहानपुर: 20 घंटे बारिश का कर्फ्यू
दो साल में पहली बार ताप्ती नदी का जलस्तर 223 मीटर तक पहुंचा। यह खतरे के निशान से 2.20 मीटर ऊपर है। निचली बस्तियों में अलर्ट जारी कर दिया है। शहर में 20 घंटे से लगातार बारिश जारी है। इससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। लोग रोजमर्रा के कामकाज के लिए घरों से बाहर भी नहीं निकल पा रहे हैं। 20 घंटे में 2.3 इंच बारिश हो चुकी है। हर रास्ते जाम हो गए हैं। नदी का जलस्तर और बढ़ता है, तो नागझिरी, पीपल घाट, खातू घाट, राजघाट, सतियारा घाट, नागझिरी घाट सहित जैनाबाद-जयसिंहपुरा की निचली बस्तियों को खाली करना पड़ सकता है। बाढ़ से दो दर्जन से ज्यादा गांवों का संपर्क शहर से टूट गया है। जैनाबाद, जयसिंहपुरा, बाड़ा जैनाबाद, सारोला गांवों के लोग नदी से आवागमन करते है। जैनाबाद के ग्रामीण नावों से शहर आते हैं लेकिन बाढ़ के कारण नाव चलाने पर भी रोक लगा दी है।  

उज्जैन में सारी रात बरसा पानी
उज्जैन में मंगलवार रात को तेज बारिश के बाद बुधवार को भी रिमझिम बारिश हो रही है। 24 घंटे शहर में पौने तीन इंच पानी बरसा। अब तक शहर में 27 इंच बारिश हो चुकी है, जो अब तक की औसत बारिश से 2 इंच ज्यादा है। रात 11 बजे शिप्रा के त्रिवेणी स्टाप डेम पर 18 फीट पानी था। इंदौर के यशवंत सागर का एक गेट रात 11.50 बजे 3 फीट खोला गया इससे गंभीर डेम का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। गंभीर डेम में 17 घंटे में 300 मिलियन क्यूबिक फीट (एमसीएफटी) पानी आया। सुबह 8 बजे डेम का जलस्तर 1072 एमसीएफटी था, रात 1 बजे यह बढ़कर 1372 एमसीएफटी हो गया। डेम की क्षमता 2250 एमसीएफटी है। पिछले साल इस अवधि में 220.048 एमसीएफटी पानी था।

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