तो क्या जातिगत आरक्षण पर शिवराज सिंह की सोच बदल गई है?

10 June 2018

उपदेश अवस्थी/भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के संगठन अजाक्स के एक कार्यक्रम में अचानक पहुंचकर सीएम शिवराज सिंह ने ऐलान किया था कि 'कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता' इसके बाद उनका मप्र में तीखा विरोध हुआ। काफी प्रयासों के बाद भी सवर्ण समाज इस मुद्दे पर शिवराज सिंह यहां तक कि भाजपा से भी नाराज है। इस बीच शिवराज सिंह ने एक इंटरव्यु में कुछ ऐसा बयान दिया, जो यह प्रतीत कराता है कि शिवराज सिंह अब जातिगत आरक्षण से सहमत नहीं है। वो परिश्रम को तवज्जो देते हैं। 

मप्र में विधानसभा चुनाव से पहले दैनिक भास्कर ने सीएम शिवराज सिंह से 11 सवाल पूछे। इनमें से एक सवाल ऐसा था जो सीधे आरक्षण की बात तो नहीं करता परंतु जातिगत आरक्षण नीति की तरफ इशारा करता है। सवाल था 'क्या जरूरी है, भाग्य या प्रतिभा ?' यहां हम भाग्य से तात्पर्य जन्म से मानते हैं, जिससे जाति का निर्धारण होता है। जिसके आधार पर आरक्षण तय किया जाता है। सीएम शिवराज सिंह ने इस प्रश्न के जवाब में कहा 'मुझे लगता है, कड़ी मेहनत जरूरी है।'

प्रश्न में दैनिक भास्कर ने स्पष्ट नहीं किया कि उनका संदर्भ क्या था और उत्तर में सीएम शिवराज सिंह ने भी स्पष्ट नही किया कि उनका संदर्भ क्या है। अत: यह माना जा सकता है कि आरक्षण के मामले में सीएम शिवराज सिंह की सोच बदल रही है क्योंकि भाग्य और प्रतिभा के बीच सबसे बड़ी जंग सरकारी नौकरियों और एडमिशन को लेकर ही है। जहां 90 प्रतिशत लाने वाला प्रतिभाशाली पीछे रह जाता है और 45 प्रतिशत लाने वाला भाग्यशाली जातिगत आरक्षण के कारण नौकरी हासिल कर लेता है। 
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