मप्र की नई संविदा नीति दोषपूर्ण एवं महिला पर अत्याचारी है

30 June 2018

श्वेता अग्रवाल। महोदय, कई महीनों से आंदोलन और हड़ताल कर रहे प्रदेश के लगभग 2 लाख संविदा कर्मचारियों को लुभाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन समस्त संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की घोषणा की थी। साथ ही संविदा व्यवस्था को अन्यायपूर्ण एवं अभिशाप बताया था लेकिन एक बार फिर हमेशा की तरह यह केवल एक घोषणा मात्र बन कर रह गई। दिनांक 29 मई 2018 को केबिनेट में इसके विपरीत एक संविदा नीति लाकर 5 जून 2018 को आदेश जारी कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि सरकार के दिग्गज और अनुभवी वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा यह संविदा नीति बनाई गई है जो कि पूर्ण रूप से असंवैधानिक है। संविदा नीति अत्यंत दोषपूर्ण एवं केवल कागजी कार्रवाई है। जिसमें कई खामियों के कारण इसका क्रियान्वयन संभव ही नही है, अधिकांश समय केवल सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन प्राप्त करने मे ही निकलना सुनिश्चित है। इसके साथ ही इस नीति के माध्यम से Maternity Benefit Amendment Act 2017 एवं माननीय उच्चतम न्यायलय के पूर्व आदेश समान वेतन समान कार्य की भी अवहेलना की गई है।

इस नीति में कुछ परियोजनाओं को छोड़कर अन्य कई निगम मंडलों एवं मध्यप्रदेश शासन के कई विभागों के अंतर्गत कार्यरत स्वशासी संस्थानों का कोई उल्लेख नहीं है। जिससे इन संस्थानो में कार्यरत हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारियों का भविष्य बर्बादी की कगार पर है।

संविदा नीति के बिंदु क्रमांक 1.14.4 में महिला कर्मचारियों के लिए मात्र 90 दिवस के प्रसूति अवकाश का प्रावधान किया गया है जो कि पूर्णतः असंवैधानिक है। इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के राजपत्र क्रमांक 6 दिनांक 28 मार्च 2017 (Maternity Benefit Amendment Act 2017) के अनुसार किसी भी श्रेणी के पद पर कार्यरत महिला कर्मचारी को न्यूनतम 26 सप्ताह अर्थात 182 दिवस के प्रसूति अवकाश का प्रावधान किया गया है। परंतु नई संविदा नीति में इसकी अवहेलना करते हुए मात्र 90 दिवस के प्रसूति अवकाश का प्रावधान किया गया है।

संविदा नीति के बिंदु क्रमांक 1.14.5 में संविदा कर्मचारियों का मासिक पारिश्रमिक, समकक्ष नियमित पदों के वेतनमान के न्यूनतम का 90 प्रतिशत निर्धारित किये जाने का प्रावधान किया है जो कि माननीय उच्चतम न्यायलय के दिनांक 26 अक्टूबर 2016 के आदेश- समान वेतन समान कार्य की अवमानना है।

अभी हाल ही में नवम्बर 6, 2017 में भाजपा शासित हरियाणा सरकार द्वारा उच्चतम न्यायलय के आदेश के परिपालन में संविदा कर्मचारियों के साथ-साथ आउटसोर्स कर्मचारियो को भी समान वेतन समान कार्य का लाभ प्रदान किया जा चुका है। 
श्वेता अग्रवाल
समाज सेवक, भोपाल

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