प्राइवेट स्कूलों में फीस घोटाला, शिक्षा विभाग का संरक्षण ?

11 June 2018

भोपाल। प्राइवेट स्कूल आपसे जो फीस ले रहे हैं, उसे वो सरकारी दस्तावेजों में घोषित नहीं करते। यानी की वो सरकारी दस्तावेजों में घोषित की गई फीस से कहीं ज्यादा रकम आपसे वसूल कर रहे हैं। यह एक बहुत बड़ा घोटाला और शिक्षा विभाग के संरक्षण में चल रहा है। इसका खुलासा educationportal पर मौजूद जानकारी देखने के बाद हुआ। प्राइवेट स्कूलों ने खुलेआम सामान्य छात्रों से वसूली जाने वाली फीस की जानकारी छुपा ली और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। 

सरकार ने शिक्षा का अधिकार के वेब पोर्टल पर यह व्यवस्था दी थी कि उसमें प्रत्येक निजी स्कूल को खाली सीटों के साथ यह भी स्पष्ट बताना होगा कि वह अन्य सामान्य बच्चों (जो फीस देकर पढ़ रहे हैं) से कितनी फीस ले रहा है? पर सरकारी कागजों में दर्ज फीस सार्वजनिक होने के डर से इस कॉलम को अधिकतर स्कूलों ने खाली छोड़ दिया है। शिक्षा विभाग ने भी इसे भरवाने में दिलचस्पी नहीं ली है जिसने शिक्षा विभाग पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। 

एक आम अभिभावक को यह पोर्टल पारदर्शिता का वरदान साबित होने वाला था क्योंकि इसके माध्यम से उनके बच्चों के लिए ली जा रही फीस और निजी स्कूलों द्वारा सरकार को बताई जा रही फीस क्या है, यह पता चल जाता। यदि फीस सही दर्ज होती तो तसल्ली हो जाती, गलत होने पर आपत्ति लेने का अधिकार मिल जाता लेकिन स्कूलों ने इस कॉलम को खाली छोड़ दिया और जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे भरवाने के लिए दवाब तक नहीं बनाया।  

यहां देखें कैसे खुलेआम खेला जा रहा है भ्रष्टाचार का खेल
आरटीई के ओपन पोर्टल पर बाकायदा नौ कॉलम हैं जिनमें से आखिरी कॉलम में स्कूल द्वारा सामान्यत: अन्य बच्चों से ली जाने वाली फीस भरना था जो खाली छोड़ रखी है। 
आप भी इस लिंक पर जाकर देख सकते हैं कि जहां आपके बच्चे पढ़ रहे हैं, उन्होंने सरकार को अपनी फीस दर्शाई है या नहीं। 
http://educationportal.mp.gov.in/RTESR/Lottery/Public/RTEQuota_Seat_vacancy_For_Year_17.aspx

फीस दर्शाना अनिवार्य अन्यथा भुगतान कैसे होगा
सरकार द्वारा नि:शुल्क प्रवेश के तहत पढ़ने वाले प्रति बच्चे के ऐवज में स्कूल संचालक को प्रतिवर्ष करीब 4400 रुपए प्रतिपूर्ति राशि दी जाती है। यह राशि स्कूल की सामान्य फीस का मूल्यांकन करने के बाद ही दी जाती है। अब जबकि पोर्टल पर सामान्य छात्रों से ली जाने वाल फीस ही दर्ज नहीं की गई तो फिर आरटीई के तहत पढ़ने वाले बच्चों की फीस सरकार कैसे भरेगी। 
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