नया शिगूफा मप्र में एक और सरकारी डेंटल कॉलेज | EDITORIAL by Rakesh Dubey - Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh)

Bhopal की ताज़ा ख़बर खोजें





नया शिगूफा मप्र में एक और सरकारी डेंटल कॉलेज | EDITORIAL by Rakesh Dubey

28 June 2018

राकेश दुबे@प्रतिदिन। सरकार को 1961 के बाद अब मध्यप्रदेश में एक और सरकारी दंत चिकित्सा महाविद्यालय [डेंटल कालेज] खोलने की आवश्यकता महसूस हुई है। विश्व स्वास्थ्य सन्गठन की रिपोर्ट को आधार बनाकर इसके औचित्य को सही ठहराता एक प्रस्ताव प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग में घूम रहा है। “1000 की आबादी पर एक दंत चिकित्सक की आवश्कता” 1990 में कहे गये इस वाक्य पर जोर दिया जा रहा है कि प्रदेश में एक और सरकारी दंत चिकित्सा महाविद्यालय होना चाहिए। इस विषय पर सरकार अब इतनी गंभीर क्यों है ? एक प्रश्न है, इसके विश्लेष्ण से जो उत्तर प्राप्त होता है “वो अभी नहीं तो कभी नहीं” के सिद्धांत का पोषण करता है।

प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा पर एक दृष्टि डाले तो 1946 में राज्य में पहला सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय ग्वालियर में खोला गया था। अब तक सरकार 6 चिकित्सा महाविद्यालय खोल चुकी और कुछ और खोलने जा रही है। इन महाविद्यालयों में 800 सीटें है। इसके विपरीत  पिछले कुछ सालों में रसूखदार लोगों के संरक्षण / भागीदारी में 8 निजी चिकित्सा महाविद्यालय खुलवाये गये जिनमे 1200 सीटें हैं। इन 2000 सीटों पर प्रवेश की मारमारी ने ही प्रदेश में व्यापमं जैसे घोटाले को जन्म दिया है। दंत चिकित्सा महाविद्यालय खोलना, उसमें प्रवेश और परीक्षा की कहानी किसी तिलिस्म से कम नहीं है। अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार 1961 के बाद 2018 में दूसरे दंत चिकित्सा महाविद्यालय की सोच रही है। इसके विपरीत निजी क्षेत्र में 14 दंत चिकित्सा महाविद्यालय चल रहे हैं। सरकार के पास दंत चिकित्सा में स्नातक की 40 और स्नातकोत्तर की 10 सीटें है और निजी क्षेत्र में स्नातक की 1320 और स्नातकोत्तर डिग्री हेतु 225 सीटें हैं।

मूल प्रश्न सरकार पिछले सालों में सरकारी दंत चिकित्सा महाविद्यालय क्यों नहीं खोलना चाहती थी और अब क्यों खोलने की इच्छुक है ? स्वशासी होने के बावजूद सरकारी खाते से सुरक्षित वेतन, पदोन्नति और तबादले का डर नहीं जैसी नौकरी में कौन नहीं आना चाहेगा और पालक रसूखदार हो तो कहना ही क्या।

वैसे प्रदेश में दंत चिकित्सकों के सामने रोजगार का संकट है। विभागीय विशेषग्य निजी चिकित्सा महाविद्यालयों से उत्तीर्ण छात्रों में गुणवत्ता में कमी मानते हैं। भारी-भरकम फ़ीस देने के बाद भी ये छात्र वो सब नहीं सीख पाते जिसे दंत चिकित्सा कौशल कहा जा सके। प्रदेश के एक मात्र शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय से उत्तीर्ण छात्रों का रोजगार प्रतिशत और गुणवत्ता तुलनात्मक रूप से बेहतर है। अब निजी दंत चिकित्सा महाविद्यालय से उत्तीर्ण सारे दंत चिकित्सक कहाँ जाएँ ? और पालक रसूखदार हो तो और भी कष्ट। ऐसे में एक मात्र रास्ता और और सरकारी दंत चिकित्सा महविद्यालय ही है। 1961 के बाद सरकार को अब यह शिगूफा इसी कारण सूझा है की 14 रसूखदार परिवारों के स्नातकोत्तर दंत चिकित्सकों को तत्काल सुरक्षित रोजगार उपलब्ध कराना है। अभी नही तो कभी नहीं की तर्ज़ पर। चुनाव सर पर है, लौटे तो ठीक, नहीं तो प्रस्तावित योजना में सन्तान को  सुरक्षित रोजागर तो मिल ही जायेगा।
देश और मध्यप्रदेश की बड़ी खबरें MOBILE APP DOWNLOAD करने के लिए (यहां क्लिक करेंया फिर प्ले स्टोर में सर्च करें bhopalsamachar.com
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
पूर्व में प्रकाशित लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए
आप हमें ट्विटर और फ़ेसबुक पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



-----------

अपनी पसंदीदा श्रेणी के समाचार पढ़ने कृपया नीचे दिए गए श्रेणी के ​बटन पर क्लिक करें

;
Loading...

Popular News This Week

 
-->