स्मृति के मोबाइल की हिस्ट्री किसने डीलिट की, सुसाइड नोट क्यों छिपाया: जांच

12 June 2018

भोपाल/इंदौर। इंडेक्स मेडिकल कॉलेज, इंदौर के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाने वाली 32 साल की पीजी छात्रा डॉ. स्मृति लाहरपुरे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उसके शरीर में एनेस्थीसिया की दवाओं का ओवरडोज पाया गया है। जबकि वो खुद एनेस्थीसिया की डॉक्टर थी। मौके से पुलिस को सलाइन (इंट्रा कैट) भी मिली है। घटनास्थल से सुसाइड नोट था और मोबाइल फोन की कॉल हिस्ट्री और एसएमएस भी डीलिट किए गए हैं। पुलिस इन्हीं बिन्दुओं को लेकर जांच कर रही है। छात्रा के पिता ने कॉलेज प्रबंधन पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। बता दें कि इंडेक्स मेडिकल कॉलेज का नाम व्यापमं घोटाले में भी आया था। 

पिता किशोर कुमार ने बताया वे सेंट्रल बैंक में मैनेजर हैं। जून 2016 में बेटी पीजी कोर्स के लिए सिलेक्ट हुई थी। शनिवार को उसने अपने भाई स्पंदन से बात भी की। उसने तबीयत खराब होने का जिक्र किया था। बेटी ने इंडेक्स कॉलेज में एडमिशन लिया तो उसे पता चला कि कॉलेज का एफिलिएशन नहीं था। प्रबंधन ने इसे प्राइवेट यूनिवर्सिटी बना लिया था। बेटी ने स्टूडेंट्स को एकजुट कर हाई कोर्ट में केस लगाया था, जिसका फैसला पक्ष में आया था। इस पर कॉलेज प्रबंधन को कोर्ट के निर्णय के आधार पर फीस व अन्य सुविधाएं छात्रों को देना पड़ी थी। कुछ दिन पहले बेटी के साथ केस लगाने वाले स्टूडेंट्स प्रबंधन के लोगों से मिले तो बेटी को प्रबंधन के लोगों ने अपमानित किया था। इस वर्ष अचानक डेढ़ लाख रुपए फीस भी बढ़ा दी थी। इसी से वह काफी तनाव में रहने लगी थी। पिता ने प्रखर से प्रेम संबंध की बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा प्रखर भी भोपाल का है। बेटी उससे संपर्क में जरूर रहती थी।

शव के फिंगर प्रिंट्स से खोला मोबाइल का लॉक

छात्रा के मोबाइल में फिंगर प्रिंट लॉक था। पुलिस ने शव के फिंगर प्रिंट की मदद से लॉक खोला। मोबाइल को एफएसएल जांच के लिए भेजा है। पुलिस कॉल डिटेल भी निकलवा रही है। पुलिस को कमरे से एनेस्थीसिया की कई तरह की दवाओं (इंजेक्शन) की बोतलें मिली हैं। इन सभी को मिक्स कर छात्रा ने डोज लिया है। जिला अस्पताल में पोस्टमॉटर्म करने वाले डॉक्टरों के मुताबिक छात्रा के शरीर पर चोट के निशान नहीं हैं। विसरा, टिशु और ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे हैं।

फीस के लिए परेशान करते थे

पुलिस का कहना है स्मृति के साथियों ने बताया कि उसे कॉलेज के लोग परेशान करते थे। फीस बढ़ाने को लेकर भी बीते दिनों उसका विवाद कॉलेज प्रबंधन से हुआ था। इसी के बाद उसकी परेशानी बढ़ गई थी। इस बिंदु पर भी जांच की जा रही है।

बड़ा सवाल : स्मृति के हाथ में कितने लगाई इंट्र कैथ

शाम 6 बजे तक वह कॉलेज में ड्यूटी कर रही थी फिर अचानक इंट्रा कैथ क्यों लगाना पड़ी? पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है।

प्रबंधन बोला- छात्रा की मौत में हमारी भूमिका नहीं

कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारी आरसी यादव ने कहा डॉ. स्मृति की आत्महत्या में कॉलेज प्रबंधन की भूमिका नहीं है। वह अपनी बैच के छात्र डॉ. प्रखर गुप्ता से संपर्क में रहती थी। प्रखर ने ही सुसाइड नोट अपनी अलमारी में छिपा लिया था।
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