व्यापमं घोटाला: सीबीआई ने 17 में से 6 को क्लीनचिट दी

Thursday, May 17, 2018

ग्वालियर। व्यापमं घोटाले में लोगों को उम्मीद थी कि सीबीआई के हाथ उन ताकतवरों की कॉलर तक पहुंचेंगे जहां तक एसआईटी नहीं पहुंच पा रही है परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ उल्टा सीबीआई ने ऐसे कई आरोपियों को जरूर क्लीनचिट दे दी जिन्हे एसआईटी ने जांच के बाद दोषी पाया था। बुधवार को पेश की गई चार्जशीट में भी सीबीआई ने 11 आरोपितों पर आरोप बरकार रखे हैं और 6 आरोपितों के खिलाफ साक्ष्यों का अभाव बताकर क्लीन चिट दे दी। जबकि एसआईटी ने 17 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। साथ ही सीबीआई ने एसआईटी की कहानी को ही दोहराया था।

व्यापमं कांड का खुलासा होने पर एसआईटी ने वर्ष 2010 में हुए पीएमटी फर्जीवाड़े में एक एफआईआर दर्ज की थी। शुरुआत में चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इसके बाद 13 और लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। एसआईटी ने मामले की जांच कर चालान भी पेश किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई सौंप दी गई।

जितेन्द्र तिजोरिया व अन्य के खिलाफ सीबीआई ने अतिरिक्त जांच की। चालान पेश करने के लिए सीबीआई लगातार समय ले रही थी, लेकिन बुधवार को सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक सौरव वर्मा व जांच अधिकारी राकेश श्रीवास्तव विशेष सत्र न्यायालय में उपस्थित हुए।

उन्होंने आवेदन पेश किया कि इस केस की सुनवाई शीघ्र चाहते हैं। कोर्ट की अनुमति के बाद सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक श्री वर्मा ने कोर्ट में पीएमटी कांड के आरोपितों के खिलाफ चालान पेश कर दिया। कोर्ट ने एक जून को आरोप तर्क की बहस की तारीख निर्धारित कर दी है। सीबीआई ने छात्र, सॉल्वर, मिडिल मेनों के खिलाफ चालान पेश किया है।

इनके खिलाफ पेश किया चालान
जितेन्द्र तिजोरिया, बादाम सिंह, धर्मेन्द्र शाक्य, राजवीर जाटव, विनोद शाक्य, हरीश शाक्य, सोवरन सोलंकी, रमेश सोलंकी, साविर अली, कुलेन्द्र यादव, प्रभात चौधरी पर आरोप बरकार रखे हैं। इनके खिलाफ धारा 419, 420, 467, 468, 471, परीक्षा अधिनियम के केस दर्ज हैं।

इन्हें दी क्लीन चिट
धुआंराम गुर्जर, कैलाश, शोभाराम, अरुण कुमार गौर, राकेश उमराव, ज्ञान सिंह जाट को क्लीन चिट दे दी। इनके खिलाफ सीबीआई को कोई सबूत नहीं मिला। जबकि एसआईटी ने इन्हें आरोपी बनाया था।

सीबीआई ने नया कुछ नहीं किया
सीबीआई ने अतिरिक्त जांच में नया कुछ नहीं किया। एसआईटी ने जिन्हें आरोपी बनाया था, उन्हें क्लीन चिट दे दी। जबकि सॉल्वर, मिडिल मेन, छात्र का खुलासा एसआईटी ने ही कर दिया था। एसआईटी ने आरोपितों को गिरफ्तार कर वर्ष 2010 में हुए फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। सीबीआई ने मामले की तीन साल जांच की। जबकि एसआईटी ने 90 दिन में चालान पेश कर दिया था। फर्जी तरीके से परीक्षा पास कराने में पिताओं पर पैसे देने का आरोप था और उन्हें एसआईटी ने मामले में आरोपी बनाया था, लेकिन सीबीआई आरोपितों के पिताओं को क्लीन चिट दे रही है।

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