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कमलनाथ: कांग्रेस पर भरोसा नहीं, सपा से गठबंधन की कोशिश

भोपाल। मध्यप्रदेश का इतिहास गवाह है, यहां भाजपा और कांग्रेस के अलावा कभी कोई तीसरी पार्टी को महत्व नहीं मिला। एक वक्त था जब लगने लगा था कि बसपा यहां तीसरी ताकत बनेगी परंतु वो बात भी गुजर गई लेकिन अब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, सपा के साथ गठबंधन की कोशिश में हैं। शायद उन्हे अपनी कांग्रेस पर भरोसा नहीं। पिछले दिनों मप्र दौरे पर आए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था, फिर भी कमलनाथ गठबंधन की संभावनाओं को आगे बढ़कर स्वीकार कर रहे हैं।

कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा, 'उत्तर प्रदेश चुनाव के वक्त हमारा गठबंधन समाजवादी पार्टी के साथ था। मध्य प्रदेश चुनाव में भी हम गठबंधन की संभावनाओं पर बात करेंगे।' बता दें कि यूपी में गठबंधन के सवाल पर एसपी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पिछले दिनों खजुराहो में एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा था, 'दोस्ती उसी से की जाती है, जिसके पास ताकत होती है। हम अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं लेकिन समाजवादी पार्टी अभी अकेले ही मैदान में है।'

...तो क्या फिर पंजे के साथ जाएंगे अखिलेश? 

अखिलेश यादव ने एमपी में चुनावी गठबंधन को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं। बीजेपी को शिकस्त देने के लिए जिस तरह से विपक्ष एकजुट हो रहा है उसको देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि एमपी में भी कांग्रेस-एसपी साथ आ सकते हैं।

एक तरफ अहंकार, दूसरी तरफ घबराहट

कमलनाथ की नियुक्ति के साथ ही मप्र में कांग्रेस की चाल बदल गई है। कमलनाथ से जुड़े नेताओं में अहंकार साफ दिखाई देने लगा है। पीसीसी में अक्सर सन्नाटा रहता है परंतु यदि कहीं कोई पदाधिकारी बैठा हो तो गुहार लगाने आए पीड़ितों से कुछ इस तरह व्यवहार करता है, मानो मप्र की सत्ता बदल चुकी है, बस शपथग्रहण शेष है। कमलनाथ तो छिंदवाड़ा में भी आम कार्यकर्ता की पहुंच से बाहर थे। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी उनकी यही स्थिति है। उनकी तुलना में सीएम शिवराज सिंह ज्यादा आसानी से उपलब्ध हैं। लेकिन इस तरह के बयानों ने कमलनाथ के भीतर एक घबराहट भी नजर आती है। या तो उन्हे खुद पर भरोसा नहीं है, या फिर उन्हे मप्र में कांग्रेस के ताने बाने पर यकीन नहीं रह गया।