राजस्थान: 2 घंटे में 22 मौतें, बवंडर ने मचाई तबाही | NATIONAL NEWS

Thursday, May 3, 2018

RAJASTHAN WEATHER REPORT | JAIPUR | राजस्थान के चार जिलों में बवंडर ने बुधवार को जमकर तबाही मचाई। इस दौरान हादसों में 22 लोगों की मौत हो गई। भरतपुर में 10, धौलपुर में 6, अलवर में 3 और झुंझुनूं में एक की मौत हुई। शाम करीब 6 बजे आए इस बवंडर की रफ्तार 100 किमी प्रति घंटे की रही। इन जिलों में देर रात तक बिजली गुल रही। 100 से ज्यादा लोग जख्मी हुए। अलवर में तूफान से कई मकानों के टीनशेड और छतों पर रखी पानी की टंकियां उड़ गईं। यहां एक बच्ची समेत 3 लोगों की मौत हो गई और 20 घायल हो गए। इस दौरान कई पेड़ और बिजली के पोल धराशायी हो गए। कई जगह सड़कों पर और रेलवे ट्रैक पर पेड़ पोल गिरने से यातायात व्यवस्था ठप रही।

भरतपुर में 10, धौलपुर में 6, अलवर में 3, झुंझुनूं में 1 की मौत
बीकानेर में 38 किमी घंटा की गति से चली आंधी चली।
इस दौरान राज्य में 500 मीटर विजिबिलिटी रही।
मकान की छत गिरने से एक मौत
झुंझुनूं के रवां गांव में अंधड़ से एक निर्माणाधीन मकान की छत गिरने से एक शख्स की मौके पर ही मौत हो गई और एक बच्ची समेत 5 लोग घायल हो गए। इनको सिंघाना के प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया। एक जख्मी को जयपुर रैफर कर दिया गया।

अलवर में तूफान से पुरानी सब्जी मंडी में पेड़ के नीचे दबने से बरखेड़ा निवासी 27 साल के राकेश जांगिड़ की मौत हो गई। बहरोड़ में एक बच्ची की मौत हो गई। अलवर-रामगढ़ रोड पर सुधासागर गोशाला के पास कार पर पेड़ गिरने से हिंडौन के रहने वाले मुकेश (45) की मौत हुई है। उसके तीन साथी गंभीर रूप से घायल हो गए।एडीएम सिटी महेंद्र मीणा ने बताया कि तूफान से हुए हादसों में करीब 20 लोगों के घायल होने की सूचना है।

आंधी ने बीकानेर में 10 और जयपुर में 8 डिग्री पारा गिराया
बीकानेर में 38 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल, जिससे पारा 45 डिग्री से गिरकर 35 डिग्री पर आ गया। जयपुर में आंधी गति 18 किलोमीटर प्रति घंटा रही। आंधी से दृश्यता 500 मीटर ही रही। जयपुर में पारा 42.7 डिग्री था जो शाम को तेज हवाओं के कारण 8 डिग्री सेल्सियस कम हो गया। दूसरी ओर, बुधवार को बूंदी प्रदेश में सबसे ज्यादा गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान 47 डिग्री दर्ज किया गया। जैसलमेर व कोटा का तापमान भी 45 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहा। वहीं पिलानी में 23.7 एमएम बारिश दर्ज की गई।

इस कारण आते हैं बवंडर
ज्यादातर रेगिस्तान भूमध्य रेखा के इर्दगिर्द है। इस क्षेत्र में वायुमंडलीय दबाव बहुत अधिक होता है।
यह दबाव ऊंचाई पर मौजूद ठंडी शुष्क हवा को जमीन तक लाता है। इस दौरान सूरज की सीधी किरणें इस हवा की नमी समाप्त कर देती हैं।
नमी समाप्त होने से यह हवा बहुत गर्म हो जाती है। इस कारण बारिश नहीं हो पाती है और जमीन शुष्क और गर्म हो जाती है।
जमीन गर्म होने के कारण नमी के अभाव में धूल के कणों की आपस में पकड़ नहीं रह पाती है। ऐसे में ये हवा के साथ बहुत आसानी से ऊपर उठना शुरू कर देते हैं।
हवा की गति 40 किलोमीटर से अधिक होने पर ये धूल कण एक बवंडर का रूप धारण कर लेते हैं।
बवंडर के साथ धूल के कण 10 से 50 फीट की ऊंचाई तक उठते हैं। कई बार ये इससे भी अधिक ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं।

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