कठुआ गैंगरेप: पुलिस की चार्जशीट गलत, रेप तो हुआ ही नहीं: सच या अफवाह | NATIONAL NEWS

Updesh Awasthee

नई दिल्ली। जम्मू के पत्रकार श्री अवधेश चौहान की एक खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें बताया गया है कि जम्मू संभाग के कठुआ जिले के रसाना गांव में आठ साल की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म व हत्या की चार्जशीट में जो साक्ष्य और तथ्य पेश किए गए हैं उनमें कई कड़ियां ऐसी हैं, जो आपस में मेल नहीं खातीं। कठुआ जिला अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (एसआइटी) को जो बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भेजी है, वह एक नहीं बल्कि दो हैं। दोनों में ही रेप का कोई जिक्र तक नहीं है, जबकि एक अन्य खबर के मुताबिक दिल्ली की एक फॉरेंसिक रिपोर्ट आई है, जिसमें ये बात कंफर्म हो गई है कि बच्ची के साथ मंदिर के अंदर बलात्कार किया गया था। फॉरेंसिक लैब एफएसएल ने अपनी रिपोर्ट में तमाम सबूतों की जांच के बाद उन्हें सही पाया है।

जम्मू से आई खबर में कहा गया है कि पहली रिपोर्ट में लिखा गया है कि बच्ची के शरीर पर छह जख्म हैं, जबकि दूसरी रिपोर्ट में सात जख्म का जिक्र है। एक जख्म कान के पास लगभग दो सेंटीमीटर है। यह जख्म ऐसा होता है जो गिरने की वजह से भी आमतौर पर होता है। खोपड़ी में कोई फ्रेक्चर नहीं है। क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में दावा किया गया है कि बच्ची का गला घोंटने के बाद उसके सिर पर पत्थर मारा गया। जानकारों के अनुसार अगर पत्थर मारा जाए तो जख्म की तीव्रता अधिक होती। बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह थ्योरी भी मेल नहीं खा रही।

रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि बच्ची के पेट में नशीली दवाई मिली है। जहां तक बच्ची के शरीर पर चोट के निशान की बात है तो उसके दाहिने बाजू, पेट और निचले हिस्सों पर खरोचें हैं।

दूसरी रिपोर्ट: जांघ पर खरोंचें और हाइमन था फटा
दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जांघ पर कुछ खरोंच पाई गई हैं, जो गिरने के कारण भी हो सकती हैं। रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा यह किया गया है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ है। इतना जरूर है कि बच्ची का हाइमन फटा हुआ है। श्री महाराजा गुलाब सिंह (एसएमजीएस) अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ का कहना है कि हेमेन घुड़सवारी, तैराकी, साइक्लिंग, जोर का काम आदि करने से भी टूट सकता है। रिपोर्ट में बच्ची के गुप्तांग और एफएसएल भेजे गए कपड़ों में भी कोई वीर्य नहीं पाया गया है। हालांकि क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट में यह दावा जरूर किया है कि जांच के लिए एफएसएल में भेजे गए कपड़े धो दिए गए थे।

हत्या कहीं और होने का अंदेशा
पुलिस की बड़ी चूक यह भी है कि उसने आरोपितों के अंडर गारमेंट्स भी एफएसएल में नहीं भेजे। अगर भेजे होते तो जांच में कुछ मदद मिल सकती थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्ची के गुप्तांग में हल्का खून का धब्बा जरूर है। यह चोट के कारण भी हो सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बच्ची का शव जिस दिन मिला, उसकी मौत 36 से 72 घंटे पहले हुई है। इससे लगता है कि हत्या कहीं और की गई और शव रसाना में फेंका गया।

मिले बाल पर भी उठे सवाल
एक और उल्लेखनीय बात यह है कि बच्ची के बाल, जिन्हें देवस्थान से बरामद करने का दावा किया गया, वे मार्च में क्राइम ब्रांच ने दिल्ली एफएसएल को भेजे थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या देवस्थान की 17 जनवरी के बाद कोई सफाई नहीं हुई? ज्ञात हो कि इस देवस्थान पर लोग रोजाना नतमस्तक होते हैं।

फॉरेंसिक रिपोर्ट में कुछ और ही तथ्य

अगर फॉरेंसिक रिपोर्ट की मानें तो इस दर्दनाक वारदात के आरोपियों ने घटना के बाद सबूतों को मिटाने की हर संभव कोशिश की थी। आरोपियों ने पीड़ित बच्ची के सलवार फ्रॉक को धो डाला था, ताकि उस पर कोई खून का धब्बा न रह जाए।
एसआईटी ने बच्ची के कपड़ों को पहले फोरेंसिक जांच के लिए श्रीनगर फॉरेंसिक लैब भेजा था लेकिन वो कोई राय नहीं दे पाए क्योंकि कपड़ों को धो कर बिल्कुल साफ कर दिया गया था।
इसके बाद ही जम्मू कश्मीर के डीजीपी ने डीएनए सैंपलिंग के लिए 27 फरवरी को दिल्ली गृह मंत्रालय के सचिव को चिट्ठी लिखी। इसके बाद ही कपड़े समते अन्य सबूतों को दिल्ली की फोरेंसिक लैब भेजा गया। जहां इसकी जांच शुरू की गई।
1 मार्च को पीड़िता के जननांगों से मिले वजाइनल स्मियर, उसके बाल और पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया और आरोपी शुभम सांगरा के खून के नमूने को सात अलग-अलग पैकेटों में बंद करके दिल्ली भेजा गया था।
इसके बाद 14 दिनों के बाद मृतक बच्ची के विसरा सैंपल और एक और आरोपी परवेश के खून के नमूने भेजे गए. इसके बाद 16 मार्च को बच्ची के सलवार फ्रॉक, मौका ए वारदात के आसपास की कुछ मिट्टी और बच्ची के खून से सनी हुई मिट्टी भेजी गई. उसमे बाद 21 मार्च को आरोपी विशाल जंगोत्रा के खून के नमूने दिल्ली भेजे गए, दिल्ली की फॉरेंसिक लैब ने तीन अप्रैल को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
चार्जशीट में इस रिपोर्ट का ज़िक्र करते हुए कहा गया कि दिल्ली फॉरेंसिक लैब के पास ज़्यादा अच्छी तकनीक है, इसलिए मृतक बच्ची के सलवार फ्रॉक के धब्बों की पहचान कर ली गई. जांच में पता चल गया कि ये खून के निशान पीड़िता के डीएनए से मेल खाते हैं, वैजाइनल स्मियर में उसका खून भी पाया गया।
पुलिस की जांच में देवीस्थान से खून का धब्बा लगा हुआ एक लकड़ी का डंडा और कुछ बाल मिले मृत बच्ची की डीएनए प्रोफाइलिंग से पता चला कि सांझीराम ने उसे बंधक बनाकर रखा था।
फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट से ये भी पता चला कि शव के पास से मिले बाल के डीएनए आरोपी शुभम सांगरा के डीएनए प्रोफाइल से मेल खाता है. गौरतलब है कि मेडिकल एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट के मुतबिक बच्ची की हत्या के पहले उसका बलात्कार हुआ था।
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