देश में विकास के नाम पर कितनी महंगाई झेल सकते हैं आप ? | NATIONAL NEWS

Updesh Awasthee
नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल/डीजल की कीमतें 55 माह के उच्चस्तर पर हैं। मनमोहन सिंह सरकार के समय इस तरह की कीमतों पर भाजपा नेताओं ने काफी हल्ला मचाया था। अब बयान आ रहे हैं कि देश के विकास के लिए यह जरूरी है। सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा है कि पहले आपत्ति इसलिए थी क्योंकि पेट्रोल/डीजल पर टैक्स का पैसा घोटालेबाज खा जाते थे। अब इसलिए नहीं है क्योंकि पेट्रोल/डीजल पर टैक्स का पैसा विकास पर खर्च हो रहा है। इधर वर्ल्ड बैंक का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं यानी भारत में पेट्रोल के दाम 100 रुपए प्रतिलीटर को पार कर सकते हैं। बताने की जरूरत नहीं कि इसी के साथ बेतहाशा महंगाई भी बढ़ रही है। सवाल फिर वही देश में विकास के नाम पर कितनी महंगाई झेल सकते हैं आप ?

यदि पेट्रोल/डीजल की कीमतों की बात करें तो मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड आॅइल की कीमतों का नहीं है। मुद्दा पेट्रोल/डीजल पर लगाए जाने वाले अंधाधुंध टैक्स का है। 1 लीटर पेट्रोल/डीजल पर सबसे पहले सरकार मुनाफा कमाती है और फिर शुरू होता है टैक्स लगाने का धंधा। केंद्र सरकार के टैक्स, फिर राज्य सरकार के टैक्स, वैट टैक्स, मप्र में फिक्स टैक्स और सेस भी है। सवाल यह है कि एक उत्पादत पर कितनी तरह के टैक्स लगाए जा सकते हैं। याद दिला दें कि चाणक्य नीति के अनुसार 'किसी भी चीज पर टैक्स उतना ही होना चाहिए, जितना की ​चींटी शक्कर की बोरी में से उठा ले जाती है'

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के भाव में उछाल से नए फाइनेंशियल ईयर के पहले ही दिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी देखी गई। रविवार को दिल्ली में पेट्रोल 4 साल में सबसे महंगा हो गया। वहीं, डीजल के भाव अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए। राजधानी दिल्ली में अब पेट्रोल 73.73 और डीजल 64.58 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। ग्राहकों की नजरें अब मोदी सरकार पर टिकी हैं कि वादों के मुताबिक, एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती कर महंगाई से राहत दिलाई जाए। बता दें कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम साउथ एशियाई देशों में सबसे ज्यादा हैं। इसकी वजह है कि भारत में सरकार इंटरनेशनल मार्केट में तेल के पंप रेट का आधा टैक्स लगा देती है।

डेढ़ साल में 9 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ी थी
अरुण जेटली ने नवंबर, 2014 से जनवरी 2016 के बीच एक्‍साइज ड्यूटी में 9 बार बढ़ोत्‍तरी की। जबकि इस दौरान ग्‍लोबल मार्केट में तेल कीमतों में गिरावट आई थी। इसके बाद सरकार ने अक्‍टूबर, 2017 में सिर्फ एक बार 2 रुपए प्रति लीटर एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती की। केंद्र ने राज्‍य सरकारों को तेल पर वैट में कटौती करने के लिए भी कहा। इसके बाद सिर्फ 4 राज्‍यों महाराष्‍ट्र, गुजरात, मध्‍य प्रदेश (तीनों भाजपा शासित) और हिमाचल प्रदेश (तब कांग्रेस शासित) ने वैट घटाया था। इसमें भी मध्यप्रदेश ने वैट घटाकर सेस लगा दिया था। 
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