कमिश्नर को याद ही नहीं विभागीय परीक्षा का रिजल्ट भी जारी करना है | MP NEWS

08 April 2018

भोपाल। भोपाल सहित प्रदेश भर में मौजूद 436 एक्सीलेंस और मॉडल स्कूलों के लिए आयोजित की गई विभागीय परीक्षा का रिजल्ट आठ महीने बाद भी जारी नहीं किया जा सका है। 10 हजार 380 शिक्षकों के अलावा उन स्कूलों में पढ़ा रहे करीब डेढ़ हजार शिक्षक भी इस परीक्षा में शामिल हुए थे पर विभाग ने अब तक रिजल्ट घोषित नहीं किया है, जबकि नया शिक्षण सत्र तक शुरू हो चुका है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि कमिश्नर लोक शिक्षण संचालनालय को याद ही नहीं है कि परीक्षा परिणााम घोषित भी करना है। 

235 एक्सीलेंस और 201 मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने 24 जुलाई को एक विभागीय परीक्षा का आयोजन किया था। इस परीक्षा में जो लोग मैरिट में आते, उन्हें इन स्कूलों में पदस्थ किया जाना था पर आठ महीने बीत गए हैं और रिजल्ट तक घोषित नहीं किया गया है। विभाग ने परीक्षा के कुछ दिनों पहले इन स्कूलों में पहले से पदस्थ 3744 शिक्षकों को भी उसमें शामिल होने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद भी उनमें से 1526 ही उस परीक्षा में शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक रिजल्ट उसी समय जारी होना था किंतु कुछ शिक्षकों द्वारा परीक्षा पर आपत्ति लेकर कोर्ट में जाने से उसका रिजल्ट रोक दिया गया। इसके वाद विभाग द्वारा कोर्ट में जवाब प्रस्तुत कर स्टे भी हटवा दिया गया है लकिन रिजल्ट जारी नहीं किया। 

फाइल देखकर ही बताया जा सकेगा
मॉडल और एक्सीलेंस स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षकों की विभागीय परीक्षा की फाइल देखकर ही बताया जा सकेगा कि रिजल्ट घोषित क्यों नहीं किया गया। जल्द ही इस मामले में निर्णय लिया जाएगा। 
नीरज दुबे, आयुक्त लोक शिक्षण 

क्या घूस का इंतजार कर रहे हैं अफसर
रिजल्ट में देरी भ्रष्टाचार का संदेह पैदा करती है। यह एक विभागीय परीक्षा थी। तो क्या इसमें भी किसी तरह के भ्रष्टाचार की गुंजाइश निकाली गई है। यहां भी कोई परीक्षा घोटाला प्लान किया गया है। कहीं ऐसा तो नहीं जो साजिश रची गई थी वो अब तक कामयाब नहीं हो पाई है। इसीलिए फाइल को लटका दिया गया ताकि जिन उम्मीदवारों को जरूरत है वो किसी काले तंत्र के जरिए संपर्क कर लें। सवाल सिर्फ इतना है कि जब शिक्षण सत्र निर्धारित समय पर शुरू हो रहा है तो उसकी सारी व्यवस्थाएं निर्धारित समय पर पूरी क्यों नहीं होतीं। इस लापरवाही को क्या नाम दें। 

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