खंडित हुई दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा!, उद्यापन के दिन रसोइए की मौत | MP NEWS

Updesh Awasthee
भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 6 माह तक पैदल नर्मदा परिक्रमा करके काफी कठिन तप किया है। निश्चित रूप से धार्मिक यात्राएं सौभाग्य प्रदान करतीं हैं परंतु दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा के खंडित हो जाने की खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि परिक्रमा के उद्यापन के रोज दिग्विजय सिंह के रसोइए की नदी में डूबन से मृत्यु हो गई। मृत व्यक्ति का विधिवत क्रियाकर्म करने से पहले ही उद्यापन समारोह सम्पन्न करा दिया गया। इस तरह परिक्रमा का पुण्य निष्प्रभावी हो गया। यात्रा खंडित हो गई। 

नर्मदा परिक्रमा दिग्विजय सिंह ने विजयदशमी के दिन शुरू की थी और नर्मदा यात्रा का 9 अप्रैल को समापन हो गया। करीब 3325 किलोमीटर की इस यात्रा के दौरान उनकी पत्नी अमृता सिंह भी उनके साथ मौजूद रहीं लेकिन उनके साथ-साथ कई किलोमीटर चलकर उनके लिए नाश्ते से लेकर भोजन तक तैयार करने वाला उनका रसोइया कपिल नर्मदा में डूब गया। जिससे उसके परिवार में मातम पसरा है। बड़ी बात ये है कि उसकी मौत के दो दिन बीत जाने के बाद भी दिग्विजय सिंह मिलने तक नहीं गये।

जानकारी के अनुसार, कपिल होशंगाबाद जिले के सेमरी हरचन्द का निवासी था। दिग्विजय की नर्मदा परिक्रमा में वो भी उनके कदम से कदम मिलाया, उनके लिए नाश्ते से लेकर भोजन तक बनाने का जिम्मा भी उसी के कंधों पर था। 192 दिन बाद जब बरमान में यात्रा पूरी हुई तो कपिल दिग्विजय के लिए पोहा बनाकर नर्मदा में स्नान करने चला गया। वहां से जब वह लौटा तो बेजान हो चुका था, फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
आचार्य आशुतोष का कहना है कि यदि वह रसोइया पूरी यात्रा में दिग्विजय सिंह के साथ था तो वह भी उनका सहयात्री ही था। उसने भी धार्मिक यात्रा पूरी की। उसने पूरे श्रृद्धा भाव से यात्रा की और मोक्ष की कामना की अत: उसे मोक्ष प्राप्त भी हुआ परंतु किसी भी धार्मिक समारोह में यदि भागीदार की मृत्यु हो जाती है तो शास्त्रसम्मत यह होता है कि उस समारोह को स्थगित कर दिया जाए और सबसे पहले मृत देह का अंतिम संस्कार किया जाए। कम से कम तीन दिवस शोक रखा जाए और फिर समारोह का आयोजन किया जाए। दिग्विजय सिंह ने इस नियम का पालन नहीं किया अत: उनकी यात्रा का उद्यापन अस्वीकार माना जाएगा। 

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