त्रिपुरा: भाजपा ने चुनाव जीता है या युद्ध, मूर्तिभंजन और हिंसा क्यों | EDITORIAL

Tuesday, March 6, 2018

श्रीमद शास्त्री। त्रिपुरा में हिंसा की खबरें सुबह से आ रहीं हैं। समझ नहीं आ रहा कि त्रिपुरा में भाजपा ने चुनाव जीता है या युद्ध। चुनाव आयोग कहता है कि भाजपा ने वहां चुनाव जीता है परंतु जिस तरह की हिंसक घटनाएं हो रहीं हैं, लगता है भाजपा ने युद्ध जीता है। जैसे ईराक में युद्ध जीतने के बाद सद्दाम हुसैन की मूर्ति गिराई गई थी, वैसे ही BLADIMIR LENIN की मूर्ति गिराई गई। मानो वो त्रिपुरा का तानाशाह हो। आपत्ति यह नहीं है कि व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति क्यों तोड़ी, आपत्ति तो यह है कि उस मूर्ति को तोड़ने की प्रक्रिया क्या अपनाई गई। हिंदुओं में तो पराजित शत्रु का भी सम्मान करने की परंपरा है। त्रिपुरा में भाजपाई मुगलों जैसा बर्ताव क्यों कर रहे हैं। 

देशभर में मूर्ति तोड़ने की घटना की आलोचना के बीच मंगलवार को दक्षिण त्रिपुरा के सबरूम मोटर स्टैंड इलाके में लेनिन की एक और मूर्ति तोड़े जाने की घटना सामने आई है। वामपंथी नेताओं और उनके प्रतीकों पर हमले किए जा रहे हैं। आगजनी, मारपीट, तोड़-फोड़, झड़प और हिंसा का दौर शुरू हो गया है। कई इलाकों में धारा 144 लगा दी गई है। साउथ त्रिपुरा डिस्ट्रिक्ट के बेलोनिया सबडिविज़न में बुलडोजर की मदद से व्लादिमिर लेनिन की मूर्ति को ढहा दिया गया था। 

अब आग में घी डाल रहे हैं भाजपा के वरिष्ठ नेतागण

इस मामले में मैं और मेरे जैसे तटस्थ वर्ग को आपत्ति यह नहीं है कि व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति क्यों तोड़ी गई, हमें तो आपत्ति यह है कि किस तरह से कानून हाथ में लेकर तोड़ी गई। यदि भाजपाईयों की जगह वामपंथी होते और व्लादिमीर लेनिन की जगह डॉक्टर हेडगेवार की मूर्ति होती तब भी हमारी यही प्रतिक्रिया होती। चौंकाने वाली बात तो यह है कि त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत रॉय ने ट्वीट किया कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार जो कर सकती है, उसे दूसरी चुनी हुई सरकार खत्म भी कर सकती है। सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने तो लेनिन को आतंकवादी तक कह दिया। सोवियत संघ का संस्थापक अब आतंकवादी हो गया। 

तो सही प्रक्रिया क्या होती

त्रिपुरा में भाजपा चुनाव जीत चुकी है। बस 2 दिन और इंतजार करते। सरकार का शपथग्रहण हो जाने देते। पहली ही कैबिनेट की बैठक में व्लादिमीर लेनिन की मूर्तियों को हटाने का फैसला करते और फिर धूमधाम के साथ हटाते। सरकारी अमला खुद हटाने जाता। सरकारी हिटाची होती। ये बेवकूफी करने की क्या जरूरत थी। यदि ऐसी कार्रवाईयों को संरक्षण दिया गया तो ये प्रोत्साहित होंगे। आज मूर्तियां तोड़ी हैं, कल नेताओं की हत्या कर देंगे। उनकी पत्नियों का अपहरण कर लेंगे। उनके बच्चों को गुलाम बना लेंगे। भाजपा में कई समझदान नेता भी हैं लेकिन वो चुप हैं, क्या तमाशा है। 

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