भारत की 500 दिग्गज कंपनियों में अब कोई CMD नहीं होगा | BUSINESS NEWS

Thursday, March 29, 2018


मुंबई। कंपनियों में सीएमडी सबसे बड़ा शब्द होता है। सीएमडी यानी कंपनी का मालिक। एक ऐसा व्यक्ति जो कंपनी का चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर है। यानी एक साथ 2 पदों पर है। रिलायंस के मुकेश अंबानी और विप्रो के अजीम प्रेमजी भी अपनी कंपनियों में सीएमडी हैं परंतु अब ऐसा नहीं होगा। कंपनियों में सीएमडी जैसा पद समाप्त किया जा रहा है। अब यदि कोई व्यक्ति चेयरमैन है तो मैनेजिंग डायरेक्टर नहीं हो सकता। 

सबसे पहले 500 बड़ी कंपनियों में 1 व्यक्ति 1 पद 
पूंजी बाजार रेगुलेटर सेबी ने कॉरपोरेट गवर्नेंस पर उदय कोटक समिति की कुछ सिफारिशें मंजूर की हैं। इनमें से एक में मार्केट कैप के लिहाज से 500 बड़ी कंपनियों को 1 अप्रैल 2020 तक चेयरमैन और एमडी/सीईओ का पद अलग करने को कहा गया है। फॉर्चून पत्रिका के मुताबिक, इन 500 कंपनियों का कुल टर्नओवर भारत की जीडीपी के 60% से ज्यादा है।

मामले पर क्या तर्क है कमेटी का?
कोटक समिति का कहना है कि चेयरमैन और एमडी का पद एक शख्स के पास होने से मैनेजमेंट की स्वतंत्रता कम होती है। दोनों पद अलग-अलग शख्स को देने से गवर्नेंस का ढांचा संतुलित होगा।

इन उघाेगपतियों के पास है चेयरमैन और एमडी/सीईओ का पद
मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज
अजीम प्रेमजी विप्रो लिमिटेड
वेणु श्रीनिवासन टीवीएस मोटर्स
सज्जन जिंदल जेएसडब्लू
वेणुगोपाल धूत वीडियोकॉन
किशोर बियानी फ्यूचर रिटेल
गौतम अदाणी अदाणी पोर्ट्स

कंपनी में चेयरमैन, एमडी का क्या रोल होता है
चेयरमैन: बोर्ड ऑफ डायरेक्टर का प्रमुख होता है। इसका फोकस विजन और लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर होता है। 
एमडी/सीईओ: कंपनी के रोज के कामकाज की जिम्मेदारी होती है। इसलिए पद चेयरमैन से ज्यादा अहम होता है।

कोई कमजोर शख्स अब बन सकता है चेयरमैन
जो प्रमोटर कंपनी पर अपनी पकड़ ढीली नहीं करना चाहते, वे एमडी या सीईओ का पद अपने पास रख किसी कमजोर शख्स को चेयरमैन बना सकते हैं। इस तरह दोनों पदों का कंट्रोल उन्हीं के पास रहेगा।

91% कंपनियों में प्रमोटर के पास बहुमत शेयरहोल्डिंग
यह फैसला कंपनी में ज्यादा शेयरहोल्डिंग वाले प्रमोटरों के लिए परशानी वाला हो सकता है। देश की 91% कंपनियों में प्रमोटर या उनके परिजनों के पास बहुमत शेयरहोल्डिंग है।
सेबी ने बोर्ड मीटिंग में म्यूचुअल फंड स्कीमों में अतिरिक्त खर्च की सीमा 0.15% घटाने का भी फैसला किया है।
अभी तक म्यूचुअल फंड कंपनियों (एएमसी) को कस्टमर से स्कीम के एनएवी के 0.20% तक अतिरिक्त खर्च लेने की इजाजत थी। इसे अब 0.05% कर दिया गया है।

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