किसानों की धान अमानक बताकर करोड़ों का भुगतान रोक दिया | MP NEWS

28 February 2018

आनंद ताम्रकार/बालाघाट। सिवनी, मंडला, नरसिंहपुर, दमोह और बालाघाट में किसानों से मंडियों में धान खरीद ली गई लेकिन जैसे ही यह धान गोदामों में आई, इसे अमानक बताकर किसानों का करोड़ों रुपए का भुगतान रोक लिया गया। गौर करने वाली बात यह है कि मंडियों में धान की खरीदी खादय आपूति निगम के प्रबंधक समेत अधिकारियों का एक पैनल बनाया गया था जिसने खरीदी से पहले गुणवत्ता की जांच की। अब उसी धान को अमानक बताया जा रहा है। सवाल यह है कि यदि धान अमानक है तो खरीदी करने वाले पैनल के खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए। किसानों का पेेमेंट क्यों रोका। 

प्रदेष में शासन द्वारा इस वर्ष समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान में गंभीर अनियमितताएं प्रकाश में आई है। समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान जिसे खरीदी केन्द्र से संग्रहित कर उसका परिवहन किये जाने एवं गोदाम में भण्डारित किये जाने के लगभग देढ माह बाद नागरिक खादय आपूर्ति निगम ने लगभग 38 करोड 75 लाख रूपये मूल्य की 2.5 लाख मेट्रिक टन धान अमानक एवं निर्धारित मापदण्ड की ना पाये जाने पर उसे रिजेक्ट कर दिया गया है जिसके कारण भुगतान ही रोक दिया गया है। इन विसंगतियों के चलते करोडों रूपयों की राशि का भुगतान किसानों को अब तक नही हो पाया है। खरीदी गई धान के अपग्रेड पाये जाने के बाद 50 फीसदी भुगतान नागरिक आपूर्ति निगम के द्वारा किया जायेगा।

यह उल्लेखनीय है कि खरीफ सीजन की धान 2017-18 में समूचे प्रदेश में 1 नवंबर से 15 जनवरी तक शासन ने 2 लाख 82 हजार 362 किसानों से 1659021.70 मैट्रिक टन धान की खरीदी की है। प्रदेश के प्रमुख धान उत्पादक बालाघाट जिले में ही 1401.49 मैट्रिक टन तथा सिवनी 1427.16 मैट्रिक टन, मण्डला 990.32 एमटी, नरसिहंगपुर 1800 एमटी, दमोह 451.64 एमटी धान रिजेक्ट कर दी गई है इस प्रकार 15367.36 एमटी धान रिजेक्ट कर देने की जानकारी प्राप्त हुई है।

इस गडबडी का पता उस समय चला जब उपार्जित की गई धान परिवहन कर गोदामों में भण्डारित किये जाने हेतु पंहुचाई गई। तब धान का सेंपल लिया गया तो निर्धारित मापदण्ड की धान ना पाये जाने पर उसे रिजेक्ट कर दिया गया। यह उल्लेखनीय है कि निर्धारित मापदण्ड के आधार पर औसत मानक गुणवत्ता (एफएक्यू) की धान खरीदी किये जाने हेतु कलेक्टर की अध्यक्षता में 5 लोगों की एक समिति गठित की गई थी। जिसमें जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के महाप्रबंधक, उपायुक्त सहकारिता, खादय आपूति निगम के प्रबंधक तथा खादय अधिकारी शामिल किये गये थे जिनकी सतत मानीटरिंग में हर जिले में धान की खरीदी की गई तथा समिति के अनुमोदन पर ही धान को खरीदी हेतु मान्य किया गया।

बताया गया है कि रिजेक्ट की गई धान को निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप लाये जाने हेतु उसको अपग्रेड किया जायेगा जिस पर सरकार को अतिरिक्त आर्थिक भार उठाना पडेगा यह भी जानकारी मिली है कि खरीदी गई अमानक स्तर की 1 क्विंटल धान अपग्रेडेशन के पश्चात मात्र 50 किलो ही एफएक्यू के अनुसार मिल पायेगी।

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