सीएम शिवराज ने कहा: मुझे जीत चाहिए, चाहे जैसे भी हो! | MP NEWS

17 February 2018

भोपाल। मुंगावली और कोलारस उपचुनाव की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की तमाम रणनीतियों के बाद भी सीएम शिवराज सिंह इससे बच नहीं पा रहे हैं। उपचुनाव उनकी प्रतिष्ठा का प्रश्न बने हुए हैं। यहां आतंरिक रिपोर्ट बता रहीं हैं कि हालात अच्छे नहीं है। ना तो मुंगावली में केपी यादव को तोड़ने के बाद बंपर जीत की राह आसान हुई है और ना ही कोलारस में यशोधरा राजे सिंधिया का जादू चल पा रहा है। अंतत: सीएम ने चुनिंदा नेताओं को बुलाया और उन्हे फ्री हेंड दे दिया। उन्होंने काफी हद तक स्पष्ट कर दिया कि जीत के लिए जो चाहो करो, लेकिन सफलता की गारंटी होनी चाहिए। 

इसके लिए उन्होंने श्रीरामचरितमानस, सुन्दरकांड के एक दोहा का उपयोग किया। उन्होंने कहा 'जेहि बिधि उतरै कपि कटकु तात सो कहहु उपाइ।' आइए जानते हैं इस दोहा का क्या अर्थ है और यह किस प्रसंग के संदर्भ में है। इससे पहले हम बताते हैं कि पूरा दोहा क्या है: 
दोहा : सुनत बिनीत बचन अति कह कृपाल मुसुकाइ। 
जेहि बिधि उतरै कपि कटकु तात सो कहहु उपाइ॥59॥

इस दोहे का अर्थ क्या है

भगवान श्रीराम जब राक्षसराज रावण की लंका पर चढाई के लिए आगे बढ़ते हैं तो मार्ग में समुद्र आ जाता है। भगवान श्रीराम की सेना में किसी को कोई मार्ग नहीं सुझता। लोग हताश होने लगते हैं। उन्हे लगता है कि अब लंका पर चढ़ाई नहीं हो पाएगी। तब भगवान श्रीराम समुद्र देवता का आह्वान करते हैं और उनके प्रकट होने पर यह दोहा कहते हैं। इसका अर्थ है: 
समुद्र के अत्यंत विनीत वचन सुनकर कृपालु श्री रामजी ने मुस्कुराकर कहा- हे तात! जिस प्रकार वानरों की सेना पार उतर जाए, वह उपाय बताओ॥59॥ 
On hearing his most submissive words the all-merciful smiled and said, “Tell me, dear father, some device whereby the monkey host may cross over.॥59॥

उपचुनाव के प्रसंग में इस दोहे का क्या तात्पर्य

शिवराज की सेना के सामने ऐसी परेशानियां आ गईं हैं, जिसका निदान किसी को नहीं सूझ रहा। सब परेशान हैं और हताश होने लगे हैं। अब सीएम शिवराज सिंह, भगवान श्रीराम तो हें नहीं जो समुद्र हाथजोड़कर प्रकट हो जाए, इसलिए उन्होंने क्षेत्र के जानकार नेताओं को एकत्रित किया और कहा: अब मेरे भाषणों का प्रभाव नहीं पड़ता। मेरे विकास कार्य भी काम आ पाएंगे, मुझे संदेह है। अत: आपसब मिलकर वो उपाय निकालें जिससे चुनाव में जीत प्राप्त हो। चाहे वो लोकतांत्रिक हो, नीतिगत हो या कोई नए प्रकार का चमत्कार। 

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