पढ़िए कितना स्ट्रेस है कार्पोरेट कंपनी के कर्मचारियों की लाइफ में | EMPLOYEE NEWS

27 February 2018

नई दिल्ली। भारत में करीब 56 फीसदी कॉर्पोरेट कर्मचारी दिन में 6 घंटे से भी कम की नींद लेते हैं क्योंकि उनके एंप्लॉयर की ओर से दिए गए टारगेट का बोझ इतना ज्यादा होता है कि वे हर समय बेहद तनाव में रहते हैं। इसका सीधा असर उनकी नींद पर पड़ता है। ऐसोचैम हेल्थकेयर समिति की रिपोर्ट में सोमवार को यह जानकारी दी गई। बताया गया कि इसके कारण कर्मचारी कई गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि एंप्लॉयर की ओर से अनुचित और अवास्तविक लक्ष्य देने के कारण कर्मचारियों की नींद उड़ रही है, जिससे उन्हें दिन में थकान, शारीरिक परेशानी, मनोवैज्ञानिक तनाव, प्रदर्शन में गिरावट और शरीर में दर्द जैसी परेशानियां होती हैं और इसके कारण वे जरूरत से ज्यादा छुट्टियां लेते हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नींद में कमी की सालाना लागत 150 अरब डॉलर है, क्योंकि इससे ऑफिस में काम करने की क्षमता घट जाती है। काम का दवाब, सहकर्मियों का दवाब और सख्त बॉस, ये सभी मिलकर लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बिगाड़ रहे हैं। 

कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं कर्मचारी 
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत में वर्कफोर्स का करीब 46 फीसदी हिस्सा तनाव से जूझ रहा है। यह तनाव निजी कारणों, कार्यालय की राजनीति या काम के बोझ के कारण है। यही नहीं मेटाबॉलिक सिंड्रोम के मामले भी बढ़ रहे हैं जिसमें डायबीटीज, बढ़ा हुआ यूरिक ऐसिड, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और उच्च कलेस्ट्रॉल शामिल है। 

मोटापा और अवसाद की भरमार 
रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वेक्षण में शामिल 16 फीसदी लोग मोटापे से पीड़ित थे और 11 फीसदी लोग अवसाद से पीड़ित थे। रिपोर्ट के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर और डायबीटीज से पीड़ित लोगों की संख्या क्रमश: 9 फीसदी और 8 फीसदी है। रिपोर्ट में कहा गया कि स्पॉन्डिलोसिस (5 फीसदी), हृदय रोग (4 फीसदी), सर्वाइकल (3 फीसदी), अस्थमा (2.5 फीसदी), स्लिप डिस्क (2 फीसदी) और आर्थराइटिस (1 फीसदी) जैसी बीमारियां कॉर्पोरेट कर्मचारियों में आम हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अवसाद, थकान, और नींद विकार ऐसी स्थितियां या जोखिम हैं, जो अक्सर पुरानी बीमारियों से जुड़ी होती हैं और उत्पादकता पर सबसे ज्यादा प्रभाव डालती हैं। 

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